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Monday, January 12, 2026
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तालिबान का अफगान पर कब्जा कश्मीर के प्रति बढ़ा खतरा, जानिए क्यों?

भारत में अफगानी मूल के नागरिक कर सकते है तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन

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नई दिल्ली। आने वाले समय में भारत में रह रहे अफगानी मूल के नागरिक तालिबान और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। यह खुलासा  अफगान एकजुटता समिति के प्रमुख जिया गनी ने किया है। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान को लेकर अपनी नीति साझा करे। उन्होने आगे कहा कि (UNHCR)  किसी तरह की कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा होने से कश्मीर के लिए खतरा पैदा हो गया है। क्योंकि तालिबान पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया।
अहमद जिया गनी ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा, ‘इस बुरी हालत में सबको भारत सरकार से उम्मीद है कि वह हमारे साथ खड़ा हों। अफगानिस्तान में जो हमारे परिजन रह रहे हैं उनका भविष्य क्या है इसके लिए हम UNCR के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।’ उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्तान में जो हालात हैं, यह अफगानिस्तान की हार नहीं थी बल्कि पूरी दुनिया की हार थी।
भारत भी इसमें हार गया क्योंकि भारत का सबसे बड़ा कंपटीशन पाकिस्तान के साथ था और अब पाकिस्तान वहां पर सत्ता में आ गया है और बाद में यह खतरा कश्मीर भी पहुंच सकता है। उन्‍होंने कहा कि भारत में रह रहे सभी अफगानिस्तान मूल के नागरिक एक या 2 दिन के बाद एक बड़ा प्रोटेस्ट भारत में आयोजित करेंगे और भारत सरकार से विनती करेंगे कि मौजूदा हालात पर भारत अपनी नीति बताएं कि उनकी नीति क्या है? अफगानिस्तान में जिस दिन तालिबान ने पूरी तरह कब्जा किया, उसी दिन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए। जिसके बाद से हर कोई उन्हें लेकर नाराजगी जाहिर कर रहा है। उपराष्ट्रपति उमरुल्लाह सालेह ने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया है।  जिसका अब असर भी देखने को मिल रहा है।
पड़ोसी देश ताजिकिस्तान में स्थित अफगान दूतावास में अशरफ गनी की तस्वीरों को हटा दिया गया है और उसके स्थान पर अमरुल्लाह सालेह की तस्वीर लगाई गई हैं। बता दें कि तालिबान की ओर से लड़ने वालों में ज्यादा पाकिस्तानी लड़ाके शामिल थे। जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि तालिबान पाकिस्तान के समर्थन में अपने लड़ाकों को कश्मीर में भेज सकता है। हालांकि, अफगान पर कब्जे के बाद तालिबान ने कहा था कि हम पाक और भारत के विवाद में नहीं पड़ना चाहते, देखना होगा कि तालिबान क्या अपने वादे पर कायम रहता है नहीं।
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