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इटावा में पिछड़ी जाति के कथावाचक से अमानवीय बर्बरता, मानवाधिकार आयोग आया हरक़त में !

पीड़ित कथावाचक की शिकायत पर चार आरोपियों — आशीष (21), उत्तम (19), प्रथम उर्फ मनु (24) और निक्की (30) — को गिरफ्तार किया है।

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इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के दादरपुर गांव में एक धार्मिक कथावाचक के साथ जातिगत आधार पर की गई बर्बरता के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब पीड़ित कथावाचक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उनके साथ अमानवीय व्यवहार की पुष्टि होती है।

21 जून को गांव में भागवत कथा का आयोजन हुआ था, जिसमें कथावाचक मुकुट मणि और संत सिंह धार्मिक प्रवचन दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने कथावाचकों की जाति पर आपत्ति जताई और उन्हें ब्राह्मण न मानते हुए मंच से उतारने की मांग की। विरोध इतना बढ़ा कि कथावाचकों के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनकी जबरन चोटी काट दी गई और उन्हें अपमानित किया गया।

वीडियो में कथावाचक को एक महिला के पैरों पर नाक रगड़ते और उनके ऊपर पेशाब डाले जाने का आरोप भी सामने आया है। ये घटनाएं वायरल होते ही पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि मानव गरिमा का अपमान है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” आयोग ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इसी बीच पुलिस ने पीड़ित कथावाचक की शिकायत पर चार आरोपियों — आशीष (21), उत्तम (19), प्रथम उर्फ मनु (24) और निक्की (30) — को गिरफ्तार किया है। निक्की पर कथावाचकों के बाल काटने का मुख्य आरोप है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो घटना की निष्पक्ष जांच कर रही है।

पुलिस प्रशासन ने कहा है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं और इन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं। यह मामला न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम के अपमान की कहानी है, बल्कि जातिगत भेदभाव और हिंसा के खिलाफ सामाजिक चेतना का भी सवाल बन चुका है। आयोग और पुलिस दोनों ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ितों को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा।

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