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Wednesday, April 8, 2026
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ISIS मॉड्यूल का किया भंडाफोड़: खिलौने की कार में बम लगाकर हमले की साजिश नाकाम

आरोपी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार कर रहे थे।

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सोमवार (6 अप्रैल)दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और महाराष्ट्र एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोस्साब अहमद उर्फ कलाम और मोहम्मद हमद के रूप में हुई है। यह कार्रवाई मुंबई के कुर्ला और खडावली इलाकों में की गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों आरोपी इस्लामिक स्टेट (ISIS) से प्रेरित एक अत्यधिक कट्टरपंथी मॉड्यूल से जुड़े थे और रिमोट कंट्रोल से चलने वाली खिलौना कारों में विस्फोटक लगाकर हमले की योजना बना रहे थे। तलाशी के दौरान उनके पास से आपत्तिजनक साहित्य, संदिग्ध चैट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार कर रहे थे।

जांच में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय ‘सोल्जर्स ऑफ़ जिहाद’ और ‘मिशन ख़िलाफ़त’ जैसे नेटवर्क से जुड़े थे। साथ ही इनके संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आतंकी अबू हुफैजा से भी सामने आए हैं, जो टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करता है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमें सूचना मिली थी कि कुर्ला, शिवाजी नगर और गोवंडी के कुछ युवक प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के संपर्क में हैं। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत तीन ठिकानों पर छापेमारी की गई। संदिग्धों से पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।”

सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि मुंबई में कुछ नाबालिग भी कट्टरपंथी प्रचार के प्रभाव में आए हैं। कई अन्य संदिग्धों को निगरानी में रखा गया है और इस नेटवर्क के विस्तार की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता इस मॉड्यूल के हैंडलर्स की पहचान करने और संभावित स्लीपर सेल गतिविधियों को रोकने की है।

इससे पहले 5 अप्रैल को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से रिजवान अहमद नामक आरोपी को भी गिरफ्तार किया था, जो 2015 से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। वह पहले मुंबई की आर्थर रोड जेल और बाद में तिहाड़ जेल में बंद रह चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि जेल में रहते हुए ही उसे इस नेटवर्क में भर्ती किया गया था।

रिहाई के बाद उसने एक फास्ट-फूड दुकान खोलकर खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की, लेकिन एजेंसियों को संदेह है कि वह युवाओं को आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने में सक्रिय था।

गौरतलब है कि हाल के समय में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े मॉड्यूल का लगातार भंडाफोड़ हो रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां देश में आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार सतर्क और सक्रिय हैं।

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