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मणिकर्णिका घाट: ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के फर्जी AI वीडिओ बनाने वालों पर उत्तर प्रदेश सरकार की ग़ाज

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट को लेकर सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कथित तौर पर घाट पर ‘बुलडोज़र कार्रवाई’ की बात कहकर प्रसारित की गई तस्वीरें और वीडियो फर्जी तथा एआई-जनरेटेड पाए गए हैं। इस मामले में वाराणसी पुलिस ने शनिवार(17 जनवरी)को आठ लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र श्मशान घाटों में गिना जाता है। यहां कथित तोड़फोड़ की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। इन पोस्ट्स के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वायरल हो रहे दृश्य पूरी तरह फर्जी हैं और इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में एक प्रेस वार्ता के दौरान इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर जानबूझकर भ्रामक और मनगढ़ंत सामग्री फैलाई गई। उन्होंने इसे काशी की छवि को धूमिल करने और विकास कार्यों को बाधित करने की साजिश बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े तत्वों द्वारा एआई-जनरेटेड वीडियो का इस्तेमाल कर दलमंडी क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया।

पुलिस और सरकारी सूत्रों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों को लेकर झूठी तस्वीरें और वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रसारित किए गए। इनमें से कुछ पोस्ट 16 जनवरी की रात करीब 10.02 बजे एक्स हैंडल @daksinapathpati (अशुतोष पोटनिस) द्वारा साझा की गई थीं। इन पोस्ट्स में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी छेड़छाड़ की गई तस्वीरें भी शामिल थीं, जिन्हें धार्मिक भावनाएं आहत करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया बताया गया है। कार्रवाई के बाद संबंधित एक्स अकाउंट को डिएक्टिवेट कर दिया गया।

अधिकारियों का कहना है कि इन पोस्ट्स के जरिए मणिकर्णिका घाट पर चल रहे वैध विकास कार्यों को धार्मिक परंपराओं पर हमला बताने की कोशिश की गई। कुछ मामलों में भारत सरकार की तुलना मुगल शासक औरंगज़ेब से जोड़कर प्रस्तुत करने का भी प्रयास किया गया, जिससे लोगों में और अधिक आक्रोश और भ्रम फैला।

इस मामले में चौक थाना पुलिस ने आठ व्यक्तियों और उनसे जुड़े एक्स हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। ये मुकदमे BNS की धारा 196, 298, 299 और 353 के तहत दर्ज किए गए हैं, जो झूठी जानकारी फैलाने, धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक अशांति पैदा करने और जनता को गुमराह करने से संबंधित हैं। पुलिस ने बताया कि अब तक इस प्रकरण में कुल आठ अलग-अलग केस दर्ज किए जा चुके हैं।

मामले की शिकायत GVS इंजीनियर्स कंसल्टेंट कंपनी के एक पदाधिकारी की ओर से दी गई थी, जो मणिकर्णिका घाट पर विकास और इंस्टॉलेशन का कार्य कर रही है। शिकायत में कहा गया कि कंपनी 15 नवंबर 2025 से घाट पर काम कर रही है और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी जानकारियों से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है, साथ ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में अनावश्यक तनाव फैल रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से काशी विश्वनाथ धाम का महत्व उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और श्रद्धालुओं की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने दोहराया कि काशी का विकास उसकी विरासत और धार्मिक परंपराओं से कोई समझौता किए बिना किया जा रहा है।

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