30.4 C
Mumbai
Saturday, May 16, 2026
होमक्राईमनामाआर. जी. कर मामले में तीन आईपीएस अधिकारी निलंबित

आर. जी. कर मामले में तीन आईपीएस अधिकारी निलंबित

Google News Follow

Related

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदू अधिकारी ने शुक्रवार (15 मई) को वर्ष 2024 के आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार और हत्या मामले में कथित अनियमितताओं को लेकर तीन आईपीएस अधिकारियों के निलंबन की घोषणा की। राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि विनीत गोयल, पूर्व पुलिस उपायुक्त (उत्तर) अभिषेक गुप्ता और पुलिस उपायुक्त (मध्य) इंदिरा मुखर्जी को निलंबित कर दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये अधिकारी कार्यप्रणाली में गंभीर त्रुटियों में शामिल थे, जिनमें पीड़िता के परिवार को रिश्वत देने का प्रयास और लिखित अनुमति के बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सुवेंदू अधिकारी ने आगे बताया कि जेल परिसर से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद होने के आरोपों के बाद प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम के अधीक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में जेल के दो अन्य अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है।

उन्होंने कहा, “बंगाल में हर ओर अराजकता का माहौल था और हमने कार्रवाई शुरू कर दी है। हमें जानकारी मिली थी कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच के बाद ये आरोप सही पाए गए।”

जानकारी के अनुसार, कड़ी निगरानी के बावजूद प्रतिबंधित वस्तुएं जेल के अंदर कैसे पहुंचीं, इसकी जांच आपराधिक जांच विभाग (CID) को सौंपी जा सकती है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कहीं सुरक्षा में चूक या जेल के अंदर मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तस्करी में किसी आंतरिक मिलीभगत की भूमिका तो नहीं थी।

आर. जी. कर मामला 9 अगस्त 2024 का है, जब आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक सेमिनार हॉल में एक जूनियर डॉक्टर मृत पाई गई थीं। जांच में सामने आया कि उनके साथ बलात्कार किया गया था। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।

इस मामले में 33 वर्षीय नागरिक स्वयंसेवक और TMC पार्टी के कार्यकर्ता संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने बलात्कार और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस की नाकामी और अक्षमता ने जनसैलाब खड़ा किया।  बढ़ते जनदबाव और शुरुआती जांच में अनियमितताओं के आरोपों के बाद मामला  केंद्रीय जांच ब्यूरो(CBI) को सौंप दिया गया।

जनवरी 2025 में सत्र न्यायालय ने संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, पीड़िता के परिवार ने लगातार दावा किया है कि वह इस अपराध का अकेला आरोपी नहीं था और मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की ठीक से जांच नहीं की गई।

इस वर्ष अप्रैल में पीड़िता के परिवार ने कलकत्ता उच्च न्यायलय का रुख किया। परिवार का आरोप है कि राज्य पुलिस और CBI दोनों कई महत्वपूर्ण सबूतों की जांच करने में विफल रहे। उन्होंने एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ की राय का भी हवाला दिया, जिसमें घटनास्थल पर कई लोगों की मौजूदगी की संभावना जताई गई थी।

पीड़िता की मां ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पानीहाटी से बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, वह भी न्याय की मांग को लगातार उठाती रही। साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले आर. जी. कर पीड़िता को न्याय दिलाना भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था।

यह भी पढ़ें:

उन्नाव रेप केस : सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप की सजा पर रोक लगाने वाला आदेश किया रद्द

पुणे अस्पताल में IED बम रखने के आरोप में संदिग्ध गिरफ्तार, ATS की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; भोजशाला मां वाग्देवी सरस्वती का मंदिर घोषित

“केरल की धरती पर मुस्लिम लीग का राज, यहां कानून भी लीग ही तय करेगी”

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,364फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
307,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें