उत्तर प्रदेश में बुधवार (13 मई)रात आया भीषण प्री-मानसून तूफान राज्य के लिए बड़े मानवीय संकट में बदल गया। तेज आंधी, भारी बारिश, बिजली गिरने और चक्रवाती गति वाली हवाओं ने कई जिलों में भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग जिलों से आई रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम से कम 117 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई जगहों पर घर ढह गए, पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए तथा ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
तूफान की सबसे भयावह तस्वीर बरेली से सामने आई, जहां नन्हें मियां नाम का एक व्यक्ती टीन शेड को उड़ने से बचाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान तेज हवाओं ने उसे और टीन की छत को हवा में उड़ा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह करीब 300 मीटर दूर खेत में जाकर गिरा। गंभीर चोटों और कई फ्रैक्चर के बावजूद उसकी जान बच गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे इस तूफान की भयावहता का प्रतीक माना जा रहा है।
मौसम अचानक बिगड़ने से लोग संभल भी नहीं पाए। शाम होते-होते आसमान में काले बादल छा गए और फिर तेज धूलभरी आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। कई इलाकों में 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिन्हें मौसम विशेषज्ञों ने चक्रवात जैसी स्थिति बताया है।
सबसे ज्यादा नुकसान प्रयागराज में हुआ, जहां पेड़ गिरने, दीवार ढहने और मकानों के क्षतिग्रस्त होने से 23 लोगों की मौत हो गई। मिर्ज़ापुर में 19,संत रविदास नगर में 16 और फतेहपुर में 11 लोगों की जान गई। इसके अलावा बरैली, रायबरेली, उन्नाओ, बदायूं, प्रतापगढ़, देवरिया और सोनभद्र सहित कई जिलों में भारी नुकसान दर्ज किया गया।
तूफान का असर केवल लोगों तक सीमित नहीं रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 177 से अधिक पशुओं की मौत हुई है और 330 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित रही, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुए।
घटनास्थलों से सामने आए कई वीडियो और तस्वीरों में लोग मलबे में दबे परिजनों को निकालते और तेज हवाओं के बीच सुरक्षित जगहों की ओर भागते दिखाई दिए। कई परिवारों ने रात खुले आसमान के नीचे बिताई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। राज्य सरकार ने अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर राहत पहुंचाने, नुकसान का सर्वे करने और फसल, पशुधन तथा संपत्ति के नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को बचाव और पुनर्वास कार्य तेज करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक अत्यंत गंभीर प्री-मानसून मौसमीय घटना थी, जो अचानक बने वायुदाब अंतर, अत्यधिक गर्मी और नमी के कारण और अधिक खतरनाक बन गई। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में आया यह सबसे घातक तूफानों में से एक माना जा रहा है।
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