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जालौन की “कालपी” को ‘छोटी काशी’​ भी कहते हैं, भक्तों का लगता है तांता

धर्म नगरी कालपी में शिव मंदिरों की लंबी श्रृंखला है|यहां सावन के महीने में इन मंदिरों में ऊं नम: शिवाय का स्वर गूंजता रहता है​|​ मान्यता है कि यहां के भगवान शिव​ ​नवेश्वरों के दर्शन से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के बराबर फल मिलता है​​​|​​यही वजह है कि इस नगरी को छोटी काशी कहा जाता है​|​​ ​

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सावन मास में शिव मंदिरों में दर्शन व जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों तांता लगता दिखाई दे रहा है| वैसे तो शिव दर्शनों के लिए मंदिरों में वर्ष भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन मास आने के बाद से देश के विभिन्न शिव मंदिरों व शिवालयों में भक्तों की उमड़ती भीड़ दिखाई दे रही है| ​
धर्म नगरी कालपी में शिव मंदिरों की लंबी श्रृंखला है|यहां सावन के महीने में इन मंदिरों में ऊं नम: शिवाय का स्वर गूंजता रहता है| मान्यता है कि यहां के भगवान शिव​ ​नवेश्वरों के दर्शन से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के बराबर फल मिलता है​​|​​यही वजह है कि इस नगरी को छोटी काशी कहा जाता है|​​
जालौन में कालपी के प्रमुख शिव मंदिरों में पातालेश्वर, ढोडे़श्वर, तिगडे़श्वर, रामेश्वर, बानेश्वर, गोपेश्वर, भोलेश्वर, कपिलेश्वर, फालेश्वर, नवेश्वर मंदिर हैं|​​ इसके अलावा बलखंड़ी देवी मंदिर स्थित महामृत्युंजय भगवान का मंदिर, आनंदी देवी शिवालय, भूरेलाल का शिवालय आदि हैं|​​ इनकी अपनी अलग-अलग मान्यता है|इन मंदिरों में सालभर श्रृद्धालुओं का आना जाना रहता है, लेकिन सावन के महीने में ​शिव के जलाभिषेक व दर्शन के लिए ​भक्तों की​ भारी भीड़ उमड़ती​ है|​ ​
कालपी के नवेश्वरों में पातालेश्वर मंदिर का विशेष महत्व है|यमुना तट पर स्थित पातालेश्वर मंदिर करीब पांच हजार वर्ष से भी ज्यादा प्राचीन बताया जाता है|​​ ऐसी मान्यता है कि मंदिर में प्रतिष्ठित शिवलिंग स्वयंभू है| वहीं, ढोडे़श्वर महादेव मंदिर का नवेश्वरों में ऊंचा स्थान है|​​ तरीबुल्दा स्थित यह मंदिर करीब ढाई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है|​ ​
वहीं, बलखंडी देवी मंदिर परिसर में बना महामृत्युंजय भगवान का मंदिर जीवन देने वाला है| ​ शिव आराधना के लिए यह अनूठा मंदिर है|भगवान मृत्युंजय मनुष्य के दुखों, परेशानियों और अहंकार का हरण करने वाले हैं|इसके अलावा नगर में गोपेश्वर महादेव, रामेश्वर महादेव, भोलेश्वर मंदिर भी हैं, जिनकी अपनी प्रतिष्ठा है|​ ​

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