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Wednesday, April 29, 2026
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 250 से अधिक की मौत

WHO की चेतावनी के भारत के लिए भी सतर्कता बरतने की जरूरत

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पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय पिछले दो दशकों के सबसे भीषण खसरा प्रकोप से जूझ रहा है। इस बीमारी ने अब तक 250 से अधिक लोगों की जान ले ली है, जिनमें से अधिकांश मासूम बच्चे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीमा पार संक्रमण (Cross-border Transmission) का ‘हाई अलर्ट’ जारी किया है। बांग्लादेश में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत के लिए भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 64 में से 58 जिलों में फैल चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 मार्च से अब तक 43 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा 216 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में पिछले दो वर्षों में, विशेषकर 2025 में, टीकाकरण दर में भारी गिरावट आई है।

बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री सरदार सखावत हुसैन ने पिछली सरकारों अवामी लीग और यूनुस सरकार के “कुप्रबंधन” को इस प्रकोप के लिए जिम्मेदार ठहराया है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण 2024 में प्रस्तावित मास इम्यूनाइजेशन ड्राइव स्थगित हो गई थी, जिसके चलते 12 महीने के बच्चों में टीकाकरण की दर 2025 में गिरकर मात्र 59.6% रह गई। वर्तमान में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

WHO की 23 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार, हिंद-पैसिफिक क्षेत्र में खसरा एक स्थानिक (Endemic) बीमारी है, इसलिए नए क्षेत्रीय प्रकोप का जोखिम उच्च स्तर है। ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे अंतरराष्ट्रीय यात्रा केंद्र होने के कारण यह वायरस भारत और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में फैल सकता है।

विशेष रूप से भारत के लिए चिंता का विषय वह जमीनी सीमाएं (Land Crossings) हैं, जो बांग्लादेश के जशोर और चापाइनवाबगंज जैसे खसरा प्रभावित शहरों से सटी हुई हैं। बिना टीकाकरण वाले यात्रियों के माध्यम से यह संक्रमण भारत में तेजी प्रवेश कर सकता है।

हालांकि भारत के वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट और ‘इंडिया एक्सपर्ट ग्रुप ऑन मिजल्स-रुबेला’ (IEG-MR) के सह-अध्यक्ष डॉ. जैकब जॉन का मानना है कि बांग्लादेश में भारी प्रकोप के बावजूद भारत में राष्ट्रीय स्तर पर महामारी की संभावना बहुत कम है। उन्होंने कहा है, “भारत में खसरा-रुबेला टीकाकरण का कवरेज बहुत अच्छा है। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, पहली खुराक का कवरेज 93.7% और दूसरी खुराक का 92.2% है। अधिकांश भारतीय बच्चों में ‘हर्ड इम्युनिटी’ (Herd Immunity) विकसित हो चुकी है, इसलिए बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने (Spillover) की आशंका कम है, हालांकि छिटपुट मामले सामने आ सकते हैं।”

भारत सरकार ने 2026 तक खसरा और रुबेला के पूर्ण उन्मूलन (Elimination) का लक्ष्य रखा है।

खसरा: एक जानलेवा और अत्यधिक संक्रामक रोग

बता दें की, खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो हवा के जरिए (Airborne droplets) फैलती है।

  • लक्षण: तेज बुखार, नाक बहना, आंखों का लाल होना, खांसी और मुंह के अंदर सफेद धब्बे (Koplik’s spots)। कुछ दिनों बाद चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चकत्ते (Rash) उभर आते हैं।

  • जटिलताएं: निमोनिया, गंभीर दस्त, अंधापन और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis), जिससे मृत्यु भी हो सकती है।

  • संक्रामकता: खसरा कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट से भी अधिक संक्रामक है। खसरे का ‘रिप्रोडक्टिव फैक्टर’ (R0) 12 से 18 के बीच है, यानी एक संक्रमित बच्चा 30 से अधिक अन्य बच्चों को संक्रमित कर सकता है।

भारत ने 2022 में मुंबई और आसपास के इलाकों में खसरे का प्रकोप देखा था, जिसके बाद टीकाकरण अभियान को और तेज किया गया। हालांकि भारत सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन WHO की चेतावनी को देखते हुए सीमावर्ती राज्यों में निगरानी (Surveillance) बढ़ाना और छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए यह बीमारी विशेष रूप से घातक हो सकती है, इसलिए माता-पिता को टीकाकरण चक्र पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।

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