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Wednesday, April 29, 2026
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नासिक TCS स्कैंडल: निदा खान के मालेगांव और मलेशिया से जुड़े तार

धर्मांतरण कर पीड़िता को विदेश भेजने की थी साजिश

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नासिक स्थित TCS से जुड़े BPO में सामने आए यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण रैकेट मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 27 अप्रैल को कोर्ट की कार्यवाही के दौरान विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) अजय मिश्रा ने खुलासा किया कि मुख्य आरोपी निदा खान के संबंध न केवल मालेगांव, बल्कि मलेशिया से भी जुड़े हुए हैं।

यह जानकारी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम सुनवाई के दौरान दी गई। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी अंतरराष्ट्रीय और सांप्रदायिक साजिश छिपी है।

अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, पिछड़े समुदाय से आने वाली दलित पीड़िता पर इस्लाम अपनाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रख दिया था। मालेगांव के कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की मदद से उसका पूरी तरह से धर्म परिवर्तन कराने और उसके दस्तावेज तैयार करने की कोशिशें की जा रही थीं।

अदालत को सूचित किया गया कि निदा खान का इरादा पीड़िता को नौकरी और पदोन्नति का लालच देकर मलेशिया भेजने का था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पीड़िता के व्यक्तिगत दस्तावेज पहले ही हासिल कर लिए गए थे और उन्हें मालेगांव स्थित संपर्कों को सौंपने की योजना थी। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और इसके लिए होने वाली फंडिंग (वित्तीय सहायता) की बारीकी से जांच कर रही है।

विशेष लोक अभियोजक अजय मिश्रा ने पीड़िता के साथ हुई मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना का विवरण देते हुए बताया, “पीड़िता को डराया-धमकाया गया और उस पर इस्लामिक रीति-रिवाजों को मानने का दबाव डाला गया। निदा खान खुद पीड़िता के घर जाती थी और उसे बुर्का पहनने, हिजाब लगाने और नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग देती थी। आरोपी ने पीड़िता के मोबाइल में इस्लामिक रील्स और यूट्यूब लिंक भी डाउनलोड कर दिए थे।”

पुलिस ने निदा खान द्वारा पीड़िता को दी गई धार्मिक किताबें और बुर्का जब्त कर लिया है। पीड़िता का विस्तृत बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जा चुका है, जिसमें उसने आरोपी द्वारा दी गई धमकियों और दबाव का पूरा कच्चा चिट्ठा खोला है।

अभियोजन पक्ष ने निदा खान की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामले की गंभीरता और विदेशी संबंधों को देखते हुए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना अनिवार्य है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलीलों में कहा कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर उस तरह के कड़े कानून नहीं हैं जैसे अन्य राज्यों में हैं।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला 2 मई 2026 तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। फिलहाल, निदा खान पुलिस की पकड़ से बाहर (फरार) बताई जा रही है, जबकि इस मामले में अन्य सात आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की एक टीम भी इस पूरे मामले की ऑन-ग्राउंड जांच कर रही है।

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