ऑपरेशन सिंदूर: सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने अबू धाबी के हिंदू मंदिर का किया दौरा

यह मंदिर न केवल शांति, सौहार्द और करुणा का प्रतीक है, बल्कि यह भारत और यूएई के बीच सांस्कृतिक सेतु को भी सुदृढ़ करता है। यहां सभी धर्म, संस्कृति और पृष्ठभूमियों के लोगों का स्वागत है।

ऑपरेशन सिंदूर: सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने अबू धाबी के हिंदू मंदिर का किया दौरा

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ऑपरेशन सिंदूर ग्लोबल आउटरीच के अंतर्गत विश्व के विभिन्न देशों की यात्रा पर निकले सात सर्वदलीय भारतीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक ने अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शिवसेना सांसद श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने किया।

प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज, मनन कुमार मिश्रा और एस.एस. अहलूवालिया, बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा, आईयूएमएल सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर, और भारत के जापान में पूर्व राजदूत सुजन चिनॉय शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल का मंदिर में भारत के यूएई में राजदूत संजय सुधीर और मंदिर के चेयरमैन अशोक कोटेचा ने गरिमामय स्वागत किया। मंदिर के दौरे के दौरान सभी प्रतिनिधि इसकी अद्वितीय वास्तुकला, आध्यात्मिक माहौल और सर्वधर्म समभाव के संदेश से गहराई से प्रभावित हुए।

प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर परिसर में प्रार्थना की और भारत-यूएई मैत्री को मजबूती देने वाले इस सांस्कृतिक केंद्र की सराहना की। उन्होंने मंदिर निर्माण में बीएपीएस संस्था और दोनों देशों के नेतृत्व द्वारा निभाई गई भूमिका की भी प्रशंसा की।

बीएपीएस मंदिर ने भी अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर इस यात्रा की जानकारी साझा करते हुए लिखा,
“ऑपरेशन सिंदूर ग्लोबल आउटरीच के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर का दौरा किया और प्रार्थना की। प्रतिनिधिमंडल में बांसुरी स्वराज, मनन कुमार मिश्रा, एस.एस. अहलूवालिया, सस्मित पात्रा, ई.टी. मोहम्मद बशीर और सुजन चिनॉय शामिल थे।”

अबू धाबी स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक पर्यावरणीय टिकाऊ तकनीकों का संगम है। यह मंदिर न केवल शांति, सौहार्द और करुणा का प्रतीक है, बल्कि यह भारत और यूएई के बीच सांस्कृतिक सेतु को भी सुदृढ़ करता है। यहां सभी धर्म, संस्कृति और पृष्ठभूमियों के लोगों का स्वागत है।

गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी 2025 में मंदिर ने अपनी प्रथम वर्षगांठ मनाई थी, जिसमें यूएई के वरिष्ठ नेतृत्व, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु शामिल हुए थे। इस समारोह ने एकता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना के एक वर्ष को श्रद्धापूर्वक चिह्नित किया था।

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