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ईरान युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य तैनाती, सऊदी अरब भेजे 13,000 सैनिक और फाइटर जेट

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पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत लगभग 13,000 सैनिकों और 10 से 18 लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। यह सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ के बाद पहली बड़ी और ठोस कार्रवाई मानी जा रही है। इस तैनाती को ईरान युद्ध के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य बलों को सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र स्थित किंग अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनात किया गया है। इस कदम का उद्देश्य सऊदी और पाकिस्तान के सैन्य क्षमताओं के बीच समन्वय बढ़ाना, संयुक्त ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना बताया गया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने भी बयान जारी कर इस तैनाती को द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग का हिस्सा बताया है।

इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में सऊदी भूमि पर पाकिस्तानी सैनिकों और विमानों की मौजूदगी सऊदी अरब की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाती है और संभावित हमलों के खिलाफ एक निवारक (deterrent) के रूप में काम करती है।

एक पाकिस्तानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह तैनाती समझौते के अनुरूप की गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी के अनुसार, “कम से कम 13,000 पाकिस्तानी सैनिक और 10 से 18 फाइटर जेट सऊदी अरब पहुंचे हैं। इसके अलावा, पहले से ही करीब 10,000 सैनिक वहां मौजूद हैं।”

बताया गया है कि पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब को मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम भी उपलब्ध कराए हैं, खासकर उस समय जब ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए थे। पिछले एक महीने में ईरान ने सऊदी अरब के कई ठिकानों, विशेषकर प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाया था।

यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चरम पर है और रविवार (12 अप्रैल) को इस्लामबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हुई। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम न केवल सऊदी अरब के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी दिखा रहा है, बल्कि पाकिस्तान इस साझेदारी के साथ किसी और के युद्ध में फंस चूका है।

दौरान सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान को 5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की है, जिससे पाकिस्तान को अपने कर्ज लेने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच पाकिस्तान में इस निवेश को बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो पाकिस्तान अपनी सैन्य तैनाती को 50,000 सैनिकों तक बढ़ा सकता है।

 

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