प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अगले महीने फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। दोनों नेताओं के बीच संभावित पुल-असाइड बैठक को लेकर कूटनीतिक हलकों में काफी चर्चा है, खासकर ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव तथा हालिया भारत-पाकिस्तान घटनाक्रम ने रिश्तों को नई चुनौती दी है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने प्रधानमंत्री मोदी को 15 से 17 जून के बीच फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया है। भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में सम्मेलन में शामिल किया जाता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकातें हमेशा वैश्विक मीडिया और रणनीतिक विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी, जब ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी व्हाइट हाउस पहुंचने वाले शुरुआती विश्व नेताओं में शामिल थे। उस बैठक के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी को महान मित्र बताया था। साथ ही दोनों देशों ने 2030 तक भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी घोषित किया था।
हालांकि इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव भी देखने को मिला। व्यापार शुल्क और टैरिफ को लेकर पहले से जारी मतभेदों के बीच मई 2026 में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई।
ट्रंप ने कई मंचों पर यह कहा कि उन्होंने व्यापारिक दबाव और अपनी पहल के जरिए दोनों परमाणु संपन्न देशों को बड़े संघर्ष से रोका। पाकिस्तान की ओर से भी ट्रंप की इस भूमिका की सराहना की गई। हालांकि भारत सरकार ने इन दावों को सीधे तौर पर ख़ारिज किया और स्पष्ट किया कि संघर्षविराम का निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे संवाद के माध्यम से हुआ था।
नई संभावित मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और व्यापारिक हित लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि G7 सम्मेलन में मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत होती है तो व्यापार विवाद, वैश्विक सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीति और दक्षिण एशिया की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
अब सभी की नजर जून में होने वाले G7 सम्मेलन पर टिकी है, जहां यह साफ हो सकेगा कि मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में नई गर्मजोशी लाएगी या फिर मौजूदा मतभेदों को कम करने की केवल एक प्रतीकात्मक कोशिश बनकर रह जाएगी।
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