आयुष मंत्रालय के मुताबिक, सूर्य मुद्रा शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का काम करती है। यह मुद्रा शरीर के अंदर मौजूद अग्नि तत्व को मजबूत करती है। जब शरीर में यह तत्व सही तरीके से काम करता है, तब पाचन बेहतर होता है, शरीर में ताकत बनी रहती है और सांस लेने की प्रक्रिया भी ठीक रहती है। यही वजह है कि सूर्य मुद्रा को अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों में सहायक माना जाता है।
सूर्य मुद्रा करने के लिए अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से हल्का दबाया जाता है और बाकी उंगलियों को सीधा रखा जाता है। योग में अनामिका उंगली को पृथ्वी तत्व से जोड़ा जाता है, जबकि अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है। जब अंगूठा अनामिका पर दबाव बनाता है, तब शरीर में गर्मी बढ़ती है और भारीपन कम होने लगता है।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शरीर में जमा कफ कम करने में मदद मिलती है। अस्थमा की परेशानी में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और कफ जमने लगता है। इसकी वजह से मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अस्थमा में दवाइयां जरूरी हैं और योग को सिर्फ सहायक तरीके के रूप में अपनाना चाहिए।
सूर्य मुद्रा के कई फायदे हैं। यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद करती है। इसके अलावा, यह पेट से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद मानी जाती है। गैस, अपच और पेट भारी रहने जैसी परेशानियों में इस मुद्रा का नियमित अभ्यास राहत देता है।
मानसिक सेहत के लिए भी सूर्य मुद्रा अच्छी मानी जाती है। यह मन को शांत रखने और सकारात्मक सोच बढ़ाने में मदद करती है। नियमित अभ्यास से दिमाग शांत रहता है और तनाव कम महसूस हो सकता है।
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