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Tuesday, March 24, 2026
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ट्रम्प का दावा – “पाकिस्तान और चीन कर रहे हैं परमाणु परीक्षण”

भारत के लिए चिंता का विषय?

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि पाकिस्तान और चीन, रूस और उत्तर कोरिया की तरह, परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। ट्रम्प ने यह खुलासा अमेरिकी चैनल CBS के कार्यक्रम 60 Minutes को दिए एक साक्षात्कार में किया। उन्होंने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेनाओं को परमाणु परीक्षण करने का निर्देश उन्होंने इसलिए दिया क्योंकि अन्य देश पहले से ऐसा कर रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा, “रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते। हम एक खुला समाज हैं, हमारे यहां पत्रकार हैं जो लिखते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करते। नॉर्थ कोरिया परीक्षण कर रहा है, पाकिस्तान भी परीक्षण कर रहा है।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यदि पाकिस्तान और चीन गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो यह भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है।

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2019 में भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे और उन्होंने व्यक्तिगत हस्तक्षेप से उस संकट को टाल दिया। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होने वाला था। यदि मैंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो लाखों लोग मारे जाते। मैंने दोनों से कहा, अगर तुम नहीं रुके तो अमेरिका तुम्हारे साथ कोई व्यापार नहीं करेगा।”

पूर्व राष्ट्रपति ने आगे कहा कि कई देश भूमिगत परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, जिनके बारे में दुनिया को जानकारी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि ऐसे परीक्षण इतने गहराई में किए जाते हैं कि सतह पर केवल हल्के झटके महसूस होते हैं। हालांकि, वैश्विक मॉनिटरिंग स्टेशन आमतौर पर ऐसे झटकों का पता लगा सकते हैं जो परमाणु विस्फोटों से उत्पन्न होते हैं।

ट्रम्प के इस बयान ने भारत की सुरक्षा रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारत 1998 के पोखरण-II परीक्षण के बाद से कोई नया परमाणु परीक्षण नहीं किया है और वह नो-फर्स्ट-यूज़ (पहले उपयोग न करने) की नीति का पालन करता है। 2025 तक भारत के पास लगभग 180 परमाणु वारहेड माने जाते हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 और चीन के पास 600 से अधिक वारहेड होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह भंडार 2030 तक 1,000 तक पहुंच सकता है।

चीन ने 2021 में फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS) का परीक्षण किया था, जो वारहेड को आंशिक कक्षाओं में भेजकर पूर्वानुमेय मार्ग से हटाता है। यह तकनीक भारत की मिसाइल रोधी प्रणाली के लिए चुनौती मानी जा रही है।

इसके अलावा, भारत के 1998 के थर्मोन्यूक्लियर परीक्षण की सफलता पर भी संदेह जताए गए थे। डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक के. संथानम ने इसे फिज़ल करार दिया था, जिसका परिणाम 200 किलोटन के बजाय मात्र 10–15 किलोटन बताया गया था।

अब ट्रम्प के दावों और अमेरिकी परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने की घोषणा के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने पोखरण-III परीक्षण की दिशा में कदम बढ़ा सकता है, ताकि हाइड्रोजन बम की दक्षता और अग्नि-VI जैसे ICBM तथा K-5 पनडुब्बी-प्रक्षेपित मिसाइलों के लिए मिनिएचर वारहेड्स का सत्यापन किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ट्रम्प के इन बयानों की पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन यह साफ है कि इस दावे ने दक्षिण एशिया में परमाणु असंतुलन को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

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