अमेरिका में एक ईरानी मूल की महिला को कथित अवैध हथियार सौदों में मध्यस्थता करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, महिला पर ईरान और सूडान के बीच ड्रोन, विस्फोटक और अन्य सैन्य उपकरणों के लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप है।
44 वर्षीय शमीम माफी को शनिवार (19 अप्रैल) रात लॉस एंजेलिस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया। वह वर्ष 2016 से अमेरिका की स्थायी निवासी बताई जा रही हैं। इस कार्रवाई की पुष्टि अमेरिकी अभियोजन पक्ष के वरिष्ठ अधिकारी बिल एसायली ने की है। उन्होंने कहा, “यदि दोषी साबित होती हैं, तो उन्हें संघीय जेल में अधिकतम 20 वर्ष की सजा हो सकती है। माफी निर्दोष मानी जाएंगी जब तक अदालत में दोष सिद्ध नहीं हो जाता।” अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सोमवार दोपहर लॉस एंजेलिस की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
FBI के अनुसार, माफी पर 70.6 मिलियन डॉलर से अधिक के एक बड़े रक्षा सौदे करवाने का आरोप है। इस सौदे में ईरान में निर्मित ‘मोहाजेर-6’ सशस्त्र ड्रोन को सूडान के रक्षा मंत्रालय को बेचने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, जांचकर्ताओं का दावा है कि माफी ने अन्य सैन्य आपूर्ति सौदों में भी भूमिका निभाई। इनमें 55,000 बम फ्यूज की आपूर्ति और एके-47 राइफलों के लिए लगभग एक करोड़ गोलियों के समझौते शामिल बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, 24 करोड़ गोलियों की एक और बड़ी खेप का प्रस्ताव भी रखा गया था।
Last night, Shamim Mafi, 44, of Woodland Hills, was arrested at Los Angeles International Airport for trafficking arms on behalf of the government of Iran. She is charged with a violation of 50 U.S.C. § 1705 for brokering the sale of drones, bombs, bomb fuses, and millions of… pic.twitter.com/l39Gf1WVed
— F.A. United States Attorney Bill Essayli (@USAttyEssayli) April 19, 2026
FBI के हलफनामे के अनुसार, माफी और उनके सहयोगियों ने ओमान स्थित ‘एटलस इंटरनेशनल बिजनेस एलएलसी’ नामक कंपनी के माध्यम से इन लेन-देन को संचालित किया। जांच में यह भी सामने आया है कि भुगतान को तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के जरिए घुमाया गया, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके और निगरानी से दूर रहा जा सके।
अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हो सकता है और इसकी गतिविधियों की व्यापक जांच जारी है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अमेरिकी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था तथा इसके जरिए कितने बड़े पैमाने पर लेन-देन किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले वैश्विक हथियार तस्करी और प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़ी जटिल चुनौतियों को उजागर करते हैं, जिनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सख्त निगरानी की आवश्यकता होती है।
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