खाना खाने के बाद आमतौर पर सभी को अच्छा महसूस होता है, लेकिन कुछ लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद पसीना आने लगता है और बेचैनी होने लगती है। कुछ लोगों के तेजी से गर्मी भी लगती है, लेकिन यह बिल्कुल भी सामान्य लक्षण नहीं है। यह संकेत है कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है। आयुर्वेद में उन लक्षणों को पाचन की परेशानी से जोड़कर देखा गया है। भले ही लक्षण सामान्य लगते हैं, लेकिन यह शरीर के भीतर बढ़ रही गर्मी को दिखाते हैं।
आयुर्वेद का मानना है कि जब शरीर में पाचन अग्नि का स्तर बढ़ जाता है, तब शरीर गर्म और तपा हुआ महसूस करने लगता है। ऐसा होने पर भोजन पेट में पचने की बजाय अधिक अग्नि से ठीक से पच नहीं पाता और शरीर के अंदर गर्मी बढ़ने लगती है और हमें पसीना आना शुरू हो जाता है। इसके अलावा, तला-भूना या फिर अधिक मसालेदार भोजन लेने की वजह से भी शरीर में पित्त बढ़ता है और पित्त बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ने लगती है। पित्त बढ़ने के कारण शरीर में जलन, सीने में जलन, खट्टी डकार आना, और अत्याधिक गैस बनने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे पाचन भी प्रभावित होता है और खाने के बाद बेचैनी भी महसूस होती है।
कई बार गलत फूड कॉम्बिनेशन के सेवन से भी शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे पाचन अग्नि प्रभावित होती है और शरीर के भीतर गर्मी का स्तर भी बढ़ जाता है। लिवर की बिगड़ी कार्यशैली भी पाचन पर असर डालती है। जब लिवर ही गति से काम नहीं करता तो शरीर भोजन को अच्छे से प्रोसेस नहीं कर पाता, और यही कारण है कि खाना ठीक से न पचने के बाद बेचैनी और घबराहट होती है।
अब सवाल है कि इन समस्याओं से कैसे राहत पाई जाए। इसके लिए आहार का संतुलित होना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि संतुलित और हल्का आहार लें, जो पचने में आसान रहे। तला-भुना या फिर अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें। आहार में पित्त को शांत करने वाली चीजों को शामिल करें, जिससे शरीर की गर्मी हो। शरीर की गर्मी संतुलित होने से पाचन आसानी से होगा और गर्मी भी कम बनेगी।
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