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क्या है ‘कॉमन योग प्रोटोकॉल’? जो शरीर को रखते हैं चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब कुछ ही हफ्तों दूर है। 21 जून 2026 को मनाए जाने वाले इस विशेष दिन की तैयारी शुरू करने का यह सबसे अच्छा समय है। अगर आप योग की दुनिया में नए हैं या अपनी दिनचर्या में योग शामिल करना चाहते हैं, तो कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) से बेहतर शुरुआत और कुछ नहीं हो सकता।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे विशेष रूप से शुरुआती लोगों के लिए डिजाइन किया है। यह प्रोटोकॉल शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने और मन को तंदुरुस्त बनाने का आसान और प्रभावी तरीका है। सबसे पहले जानते हैं कि कॉमन योग प्रोटोकॉल क्या है?

कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) एक मानकीकृत 45 मिनट का योग अभ्यास कार्यक्रम है। इसे सभी उम्र के लोगों के लिए आसान बनाया गया है। इसका उद्देश्य योग को आम लोगों तक पहुंचाना है ताकि वे स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव का लाभ उठा सकें। इसे ब्रेथ, स्ट्रेच और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर आधारित कहा जाता है- यानी सांस की सही प्रक्रिया, शरीर की मांसपेशियों को खींचना और इससे व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाना।

यह प्रोटोकॉल मुख्य रूप से चार चरणों में बांटा गया है, जो शरीर को लचीला बनाने और योगासन करने के लिए तैयार करते हैं। पहला है आगे और पीछे झुकना व खिंचाव, यह शरीर के सामने और पीछे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है। दूसरा है दाईं और बाईं ओर झुकना व खिंचाव, जो कमर और साइड की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। तीसरा दाईं-बाईं ओर घुमाव है, जो गर्दन, कंधे और शरीर को घुमाकर जोड़ों की लचीलापन को बढ़ाता है। चौथा है गर्दन को चारों ओर घुमाना, जो गर्दन की मांसपेशियों को आराम देता है।

इनके बाद चालन क्रियाएं या शिथिलिकरण यानी लूजिंग प्रैक्टिस की जाती है। इसमें ग्रीवा चालन (गर्दन), कंधों का संचालन, कटि चालन (कमर) और घुटनों का संचालन शामिल है। ये क्रियाएं शरीर के उन जोड़ों को लचीला बनाती हैं जो योगासन के दौरान ज्यादा काम में आते हैं। नियमित अभ्यास से सर्वाइकल की समस्या, तनाव, शरीर में खिंचाव, पीठ दर्द और सांस की परेशानियां कम होती हैं। साथ ही मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और स्वास्थ्य सुधरता है। इन क्रियाओं को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। खड़े होकर या बैठकर दोनों तरीकों से किया जा सकता है।

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