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Thursday, October 22, 2026
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स्वदेशी ULPGM-V3 मिसाइल ने पास किए अंतिम परीक्षण; ड्रोन से लॉन्च होने वाली घातक प्रणाली

एंटी-टैंक और एयर कॉम्बैट दोनों मोड में सफल परीक्षण, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

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भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मानव रहित हवाई वाहन से लॉन्च होने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 के अंतिम विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित DRDO परीक्षण रेंज में किए गए, जहां मिसाइल को एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर दोनों युद्ध मोड में परखा गया।

DRDO के अनुसार, ULPGM-V3 के अंतिम कॉन्फ़िगरेशन परीक्षणों ने मिसाइल की युद्धक क्षमता और संचालन दक्षता को पूरी तरह प्रमाणित किया है। इस दौरान मिसाइल को एक इंटीग्रेटेड ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS) के माध्यम से संचालित किया गया, जो लॉन्च और नियंत्रण प्रक्रिया को स्वचालित तकनीक की मदद से तेज और सटीक बनाता है।

इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) ने मुख्य प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला(DRDL),टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मिसाइल के उत्पादन और निर्माण में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड तथा अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की भागीदारी रही। वहीं इसे UAV प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने का कार्य बेंगलुरु स्थितन्यूस्पेस अनुसंधान और प्रौद्योगिकियां द्वारा विकसित प्रणालियों के माध्यम से किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि ULPGM-V3 पूरी तरह भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन प्रणाली के माध्यम से तैयार की गई है। इसके विकास में MSME सेक्टर और निजी उद्योगों की व्यापक भागीदारी रही, जिससे देश की स्वदेशी सप्लाई चेन की मजबूती भी सामने आई है। DRDO ने कहा कि परीक्षणों ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब इस तरह की उन्नत मिसाइल प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, रक्षा उत्पादन भागीदारों और उद्योग जगत को बधाई दी। उनके अनुसार, स्वदेशी तकनीक पर आधारित ऐसे हथियार भारत की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता भी कम करेंगे।

परीक्षणों के दौरान ULPGM-V3 ने अपनी बहुउद्देश्यीय युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया। एयर-टू-ग्राउंड मोड में इसने एंटी-टैंक स्ट्राइक क्षमता दिखाई और मजबूत लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाया। वहीं एयर-टू-एयर मोड में इसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों के खिलाफ सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्यूल-रोल क्षमता भारतीय UAV प्लेटफॉर्म की संचालन क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। अब ड्रोन एक साथ जमीन और हवा दोनों प्रकार के खतरों को निशाना बनाने में सक्षम होंगे।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ULPGM-V3 केवल एक मिसाइल नहीं बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी और सामरिक क्षमता का प्रतीक है। यह परियोजना दिखाती है कि भारत अब अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के डिजाइन, विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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