भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक और रणनीतिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। महाराष्ट्र स्थित निजी क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी निबे लिमिटेड (NIBE Ltd) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में ‘सूर्यास्त्र’ (PULS) मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस लाइव-फायर परीक्षण के दौरान सूर्यास्त्र प्रणाली ने महज 1.5 से 2 मीटर का ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल’ (CEP) हासिल कर दुनिया को चौंका दिया। सटीकता का यह अभूतपूर्व स्तर इस स्वदेशी रॉकेट आर्टिलरी प्लेटफॉर्म को वैश्विक स्तर पर सबसे सटीक और विनाशकारी प्रणालियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता है।
यह ऐतिहासिक सफलता सामरिक साझेदारी और घरेलू विनिर्माण के माध्यम से अत्याधुनिक और लंबी दूरी की रॉकेट प्रणालियों के स्वदेशीकरण (Indigenisation) की भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करती है।
इस्राइली तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ का अचूक संगम
‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट प्रणाली को भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत विकसित किया गया है। इसका निर्माण निबे लिमिटेड द्वारा इस्राइल की अग्रणी रक्षा कंपनी ‘एल्बिट सिस्टम्स’ (Elbit Systems) के साथ हुए एक रणनीतिक तकनीकी सहयोग समझौते के तहत किया गया है। यह प्रणाली मूल रूप से इस्राइल के प्रसिद्ध PULS (प्रिसिजन एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसे भारतीय परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार ढाला गया है। यह रणनीतिक गठजोड़ भारतीय सेना की आर्टिलरी (तोपखाने) क्षमताओं में एक युगांतकारी छलांग है।
सूर्यास्त्र (PULS) प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कम दूरी से लेकर बेहद लंबी दूरी तक दुश्मन के उच्च-मूल्य वाले ठिकानों (High-Value Targets) पर सटीक हमले कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘मॉड्यूलर और यूनिवर्सल डिजाइन’ है, जो एक ही लॉन्चर से अलग-अलग कैलिबर और श्रेणियों के युद्धक हथियारों को फायर करने की अनुमति देता है।
इसकी मारक क्षमता का ब्यौरा इस प्रकार है:
एकुलर (Accular) 122mm रॉकेट: 35 किलोमीटर की मारक क्षमता।
एकुलर (Accular) 160mm रॉकेट: 40 किलोमीटर की मारक क्षमता।
एक्स्ट्रा (EXTRA) रॉकेट: 150 किलोमीटर की दूरी तक सटीक प्रहार।
प्रेडेटर हॉक (Predator Hawk): अधिकतम 300 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन का विनाश करने में सक्षम।
इस रॉकेट सिस्टम की मारक क्षमता केवल मिसाइलों या रॉकेटों तक सीमित नहीं है। यह ‘स्काईस्ट्राइकर’ (SkyStriker) लॉइटरिंग म्यूनिशंस (जिन्हें आत्मघाती या कामीकाजे ड्रोन भी कहा जाता है) को भी तैनात कर सकता है। यह खूबी इस प्रणाली को मानव रहित हवाई हमले (Unmanned Aerial Strike) की भूमिका में भी बेहद घातक बनाती है।
चांदीपुर में हुआ यह परीक्षण इस प्रणाली की अचूक सटीकता और विश्वसनीयता की कड़ा सत्यापन है। परीक्षण में हासिल हुआ 1.5 से 2 मीटर का सीईपी (CEP) यह दर्शाता है कि यह रॉकेट बिल्कुल तय बिंदु पर ही गिरेगा।
अगर इसकी तुलना भारतीय सेना के मौजूदा और भरोसेमंद ‘पिनाका’ (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से करें, तो पिनाका मुख्य रूप से एक बड़े क्षेत्र को गोलाबारी से पाटने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसकी रेंज लगभग 37.5 किलोमीटर (शुरुआती वेरिएंट्स) है। जहां पिनाका युद्धक्षेत्र में अपनी जगह एक मजबूत और आक्रामक प्रणाली बना हुआ है, वहीं ‘सूर्यास्त्र’ की लंबी दूरी की मारक क्षमता और पिन-पॉइंट सटीकता भारत को लंबी दूरी के रणनीतिक हमलों के मामले में एक गुणात्मक बढ़त प्रदान करती है।
#WATCH | In a major boost for Indian defence forces, private sector firm Nibe Limited has successfully carried out the firing demonstration of the Suryastra rockets of 150 km and 300 Km range in ITR Chandipur Orissa. The rockets achieved CEP of 1.5 meters and 2 meters… pic.twitter.com/9qgVI913ap
— ANI (@ANI) May 20, 2026
निबे लिमिटेड और एल्बिट सिस्टम्स के बीच यह समझौता इस तरह तैयार किया गया है जिससे तकनीक का पूर्ण हस्तांतरण (Technology Transfer) और अधिकतम घरेलू उत्पादन सुनिश्चित हो सके। इस समझौते के तहत लाइसेंसिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है, जिससे निबे लिमिटेड भारत के भीतर ही इस प्रणाली के असेंबली, एकीकरण और अंततः पूर्ण पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम हो गई है।
यह न केवल भारत के घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी भारत की धाक जमा रहा है। निबे लिमिटेड को सूर्यास्त्र (PULS) लॉन्चर्स के लिए पहले ही कुछ अंतरराष्ट्रीय निर्यात ऑर्डर (Export Orders) मिल चुके हैं, जो यह साबित करता है कि भारतीय निजी रक्षा कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में उभर रही हैं।
‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता और युद्धक्षेत्र में त्वरित एक्शन
संचालन के लिहाज से सूर्यास्त्र प्रणाली बेहद लचीली और गतिशील है। इसे हर तरह के इलाकों में चलने में सक्षम पहिएदार Tatra T815 6×6 ट्रैक्ड चेसिस ट्रक पर तैनात किया जा सकता है। यह गतिशीलता इसे युद्धक्षेत्र में तेजी से तैनात होने और हमला करने की आजादी देती है।
इस प्रणाली में उन्नत नेविगेशन, कमांड और कंट्रोल सिस्टम लगे हैं, जिनकी बदौलत किसी भी फॉयरिंग मिशन को एक मिनट से भी कम समय में अंजाम दिया जा सकता है। इसमें ‘शूट एंड स्कूट’ (फायर करो और भागो) की बेहतरीन क्षमता है, जिससे दुश्मन को जवाबी कार्रवाई या काउंटर-बैटरी फायर का मौका मिलने से पहले ही यह सिस्टम अपनी जगह बदल लेता है।
रणनीतिक संदेश और सेना का आधुनिकीकरण
चांदीपुर का यह सफल परीक्षण केवल एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं है; बल्कि यह भारत के विरोधियों के लिए एक कड़ा रणनीतिक संदेश है। यह दिखाता है कि भारतीय सेना अब पारंपरिक और गैर-पारंपरिक (Asymmetric) दोनों तरह के युद्धों के लिए पूरी तरह सक्षम है।
भारतीय सेना द्वारा अपनी त्वरित आधुनिकीकरण कड़ियों के तहत इस प्रणाली के लिए पहले ही एक आपातकालीन खरीद अनुबंध (Emergency Procurement Contract) किया जा चुका है। अपनी प्रदर्शित सटीकता, विस्तारित रेंज और बहुमुखी उपयोगिता के साथ, ‘सूर्यास्त्र’ MLRS आने वाले समय में भारतीय तोपखाने की रीढ़ बनने और भारत की रॉकेट आर्टिलरी रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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