तमिलनाडु में एक सरकारी अधिकारी द्वारा तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय और दिव्यांग व्यक्तियों के संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक का वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर शेयर करने से विवाद खड़ा हो गया है। चेन्नई स्थित तमिलनाडु सचिवालय में हुई बैठक में मौजूद एक अधिकारी द्वारा इस बातचीत का फिल्मांकन करने और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने का दावा ऑनलाइन सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी ने इस फुटेज को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया रील के रूप में अपलोड किया है।
संबंधित क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और यूजर्स की ओर से इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इस बातचीत को पारदर्शिता और सुलभता के प्रतीक के रूप में सराहा, तो कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे पलों को ऑनलाइन सार्वजनिक रूप से प्रसारित किया जाना चाहिए। इस घटना से जुड़े लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति कोई सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि तमिलनाडु में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के समर्थक और एक प्रमुख समाजसेवक डॉ. पी. सिम्माचंद्रन हैं। वह ‘तमिलनाडु डिफरेंटली एबल्ड फेडरेशन चैरिटेबल ट्रस्ट’ (TNDFCT) के अध्यक्ष हैं।
जानकारी के मुताबिक, डॉ. सिम्माचंद्रन ने बताया कि यह वीडियो विजय की अनुमति लेने के बाद ही रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फुटेज दिव्यांग अधिकार समूहों की बैठक के संदर्भ में लिया गया था और बाद में इसे ऑनलाइन साझा किया गया। इस घटना के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक राजनीतिक बहस शुरू हो गई है, विशेष रूप से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद विजय की ओर लोगों का ध्यान बड़े पैमाने पर आकर्षित हो रहा है। वायरल वीडियो की वजह से प्रशासन में पारदर्शिता और सरकारी बैठकों की सामग्री का सोशल मीडिया पर बढ़ता उपयोग, इन विषयों पर चर्चा और तेज हो गई है।
समर्थकों ने इस फुटेज को जनता के प्रति विजय की सहज उपलब्धता और खुलेपन का प्रतिबिंब बताया है, जबकि आलोचकों ने तर्क दिया है कि इस तरह की रिकॉर्डिंग से औपचारिक सरकारी बातचीत को पब्लिसिटी-केंद्रित (प्रचार-केंद्रित) सामग्री में बदलने का खतरा रहता है।
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