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Thursday, May 14, 2026
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सैफ्रान के साथ साझेदारी से भारत की ‘इंजन संप्रभुता’ को मिलेगा बल

तेजस MK-2 और AMCA कार्यक्रम को नई दिशा

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भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सैफ्रान के साथ संभावित साझेदारी पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह साझेदारी खास तौर पर तेजस MK-2 लड़ाकू विमान के लिए इंजन सह-विकास को लेकर है, जो अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के F404 और F414 इंजनों की आपूर्ति में हो रही देरी के बीच अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, GE के इंजनों की आपूर्ति में देरी ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम को प्रभावित किया है। F404-IN20 इंजनों की सप्लाई बाधित होने से तेजस MK-1A की तैनाती समयरेखा पर असर पड़ा है। महामारी के बाद उत्पादन लाइन को दोबारा शुरू करने में आई चुनौतियां, पुर्जों की कमी और लॉजिस्टिक समस्याओं ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है।

ऐसे में सैफ्रान का प्रस्ताव भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी ने न केवल सह-विकास का प्रस्ताव दिया है, बल्कि पूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) साझा करने की पेशकश भी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर हो सकता है, क्योंकि अब तक इंजन तकनीक के महत्वपूर्ण हिस्से, जैसे टर्बाइन ब्लेड डिजाइन, हॉट-सेक्शन मेटलर्जी और उन्नत कूलिंग सिस्टम विदेशी कंपनियों द्वारा साझा नहीं किए जाते थे।

सैफ्रान पहले से ही भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। कंपनी हैदराबाद में 2025 तक एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा शुरू करने जा रही है, जो LEAP इंजनों की सर्विसिंग के लिए समर्पित होगी। इसके अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर गोवा में हेलीकॉप्टर इंजन MRO सुविधा स्थापित करने की भी योजना है। यह पहल भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम में सैफ्रान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत लंबे समय से विदेशी इंजनों पर निर्भर रहा है। तेजस, सुखोई Su-30MKI और मिराज-2000 जैसे विमान आयातित इंजन पर आधारित हैं, जिससे लागत और रणनीतिक निर्भरता दोनों बढ़ती हैं। ऐसे में सैफ्रान के साथ 120 kN थ्रस्ट इंजन के सह-विकास की योजना, विशेषकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए, इस निर्भरता को कम करने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है।

इस साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी। स्वदेशी इंजन निर्माण से न केवल घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, अदानी डिफेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को भी नए अवसर मिलेंगे। इससे रोजगार सृजन, कौशल विकास और उच्च मूल्य निर्माण को गति मिलेगी।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह सहयोग भारत के लिए फायदेमंद है। इंजन तकनीक पर नियंत्रण मिलने से भारत अपने विमानों को अपनी जरूरतों के अनुसार डिजाइन और अपग्रेड कर सकेगा, साथ ही निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में भारत के लड़ाकू विमानों की मांग बढ़ सकती है।

योजना के अनुसार, इस परियोजना के तहत 2027 तक प्रोटोटाइप इंजन तैयार होने और 2028 तक उड़ान परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती AMCA प्रोटोटाइप में फिलहाल GE F414 इंजन का उपयोग किया जाएगा, लेकिन भविष्य में सैफ्रान के साथ विकसित स्वदेशी इंजन उन्हें प्रतिस्थापित करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी इंजन परियोजना से मिले अनुभवों के बाद यह साझेदारी भारत को तकनीकी बाधाओं को पार करने में मदद कर सकती है। यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जो उच्च-शक्ति वाले लड़ाकू विमान इंजन स्वयं विकसित करने में सक्षम हैं।

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