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“दुनिया आपदाओं के दशक में कर रही है प्रवेश”

नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर दी बड़ी चेतावनी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (16 मई) को वैश्विक आर्थिक स्थिति पर अब तक की सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। अपने पांच देशों के यूरोपीय दौरे के दूसरे चरण के तहत नीदरलैंड के द हेग पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय आपदाओं के दशक से गुजर रही है। उन्होंने सचेत किया कि यदि मौजूदा वैश्विक संकटों को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो गरीबी मिटाने की दिशा में पिछले कई दशकों में हासिल की गई प्रगति पूरी तरह नष्ट हो सकती है।

द हेग में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने युद्धों और जारी ऊर्जा आपातकाल सहित कई अंतरराष्ट्रीय संकटों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। पीएम मोदी ने वैश्विक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा, “दुनिया नई चुनौतियों से जूझ रही है। पहले कोरोना महामारी आई, फिर युद्ध शुरू हो गए और अब ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है। यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक साबित हो रहा है।”

उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा, “अगर मौजूदा स्थिति को जल्द नहीं संभाला गया, तो पिछले कई दशकों की उपलब्धियां बह जाएंगी और दुनिया की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा वापस गरीबी के दलदल में धकेल दिया जाएगा।”

प्रधानमंत्री की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत सहित दुनिया भर के देशों में ईंधन की बढ़ती कीमतों, मुद्रास्फीति और ऊर्जा की भारी कमी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यूरोप दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले, पीएम मोदी ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीयों से स्वेच्छा से मितव्ययिता (Austerity) के उपाय अपनाने की अपील की थी ताकि अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके। उन्होंने नागरिकों से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया, जहां भी संभव हो, वर्क फ्रॉम होम का विकल्प चुनें। अनावश्यक विदेशी यात्राओं और सोने (Gold) की खरीद को सीमित करें।ईंधन बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का उपयोग करें। कृषि में अत्यधिक उर्वरकों के इस्तेमाल से बचें।

प्रधानमंत्री ने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने को देशभक्ति  का कार्य बताते हुए कहा, “हमें विदेशी मुद्रा बचाने और युद्ध संकट के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए केवल उतनी ही चीजों का उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए, जितनी आवश्यकता हो।”

यह वैश्विक संकट अब भारत की घरेलू जेब पर भी असर डालने लगा है। शुक्रवार (15 मई) को सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। लगभग चार साल के अंतराल के बाद यह पहली बड़ी मूल्य वृद्धि है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत सरकार ने दो महीने से अधिक समय तक उपभोक्ताओं को वैश्विक तेल संकट के झटके से बचाए रखा और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद लगभग 76 दिनों तक कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का बोझ खुद उठाया।

विपक्षी दलों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और पीएम मोदी की मितव्ययिता की अपील की टाइमिंग की आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के कारण तेल की कीमतों को जानबूझकर रोक कर रखा गया था।

मौजूदा ऊर्जा संकट ने पूरे एशिया को अपनी चपेट में ले लिया है। फिलीपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है, दक्षिण कोरिया ने नागरिकों को कम समय तक नहाने और केवल दिन में फोन चार्ज करने की सलाह दी है, जबकि जापान ने अपने आपातकालीन तेल भंडार को बाजार में उतारा है।

यह संकट तब और गहरा गया जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है। भारत इस संकट के प्रति बेहद संवेदनशील है क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है, और इसका आधा हिस्सा इसी रूट से होकर आता है।

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