पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर विधानसभा क्षेत्र से हाल ही में निर्वाचित भाजपा विधायक सजल घोष ने संकेत दिए हैं कि सिंगूर और नंदीग्राम भूमि आंदोलनों से संबंधित अध्यायों को राज्य बोर्ड के स्कूली पाठ्यक्रम से हटाया जा सकता है। ये आंदोलन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस द्वारा किए गए थे।
नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘एजुकेशन इंटरफेस’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए घोष ने इस संबंध में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि छात्र पार्थ चैटर्जी के बारे में भी पढ़ते हैं, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में हुई विकृतियों को सुधारा जाएगा। सजल घोष ने इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में मुग़ल सम्राटों के चित्रण पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस तरह के विवरण एक विशेष एजेंडे को पूरा करने के लिए लिखे गए थे।
उन्होंने छात्र संघ चुनावों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 2017 से अधिकांश कॉलेजों में, 2019 से प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी में और 2020 से जादवपुर युनिवर्सिटी में स्थगित छात्र संघ चुनावों को जल्द बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा अनिवार्य किए गए छात्र प्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार से छात्रों को वंचित नहीं किया जा सकता और वे इन चुनावों को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग करेंगे।
उन्होंने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की पृष्ठभूमि भी छात्र राजनीति से जुड़ी रही है। मुझे उम्मीद है कि इसी वर्ष हमें छात्र संघ चुनाव होते हुए दिखाई देंगे।”
घोष ने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि सभी आर्थिक वर्गों के लोगों के लिए शिक्षा सुलभ बनाने हेतु निजी संस्थानों की फीस को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम को भाजपा विधायक पूर्णिमा चक्रबोर्ती और तरुणज्योति तिवारी ने भी संबोधित किया। तरुणज्योति तिवारी ने कहा, “शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है, जिसके माध्यम से हम बंगाल को बचा सकते हैं।” वहीं, पूर्णिमा चक्रवर्ती ने कहा, “आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बंगाल के लिए एक नई शिक्षा प्रणाली तैयार करना हमारा लक्ष्य है।”
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