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व्यापार, रक्षा, तकनीक और जल प्रबंधन में भारत–नीदरलैंड्स सहयोग का विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड्स दौरा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई व्यापक वार्ता के बाद भारत और नीदरलैंड ने शनिवार (16 मई) को अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी के व्यापक बहुराष्ट्रीय यूरोप दौरे के तहत उनके दो दिवसीय नीदरलैंड्स दौरे के दौरान लिया गया, जिसका उद्देश्य प्रमुख यूरोपीय साझेदारों के साथ भारत की रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी भागीदारी को मजबूत करना है।

चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, तकनीक, जल प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड्स संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और उन्होंने नीदरलैंड्स को भारत के प्रमुख यूरोपीय साझेदारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित हैं। उन्होंने जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में चल रहे सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा कि नवाचार, स्थिरता, निवेश और रक्षा के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भारत और नीदरलैंड्स को डच विशेषज्ञता को भारत की गति और कौशल के साथ जोड़ना चाहिए। डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने भी भारत के साथ संबंधों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया और आर्थिक तथा रणनीतिक क्षेत्रों में और मजबूत सहयोग का समर्थन किया।

द्विपक्षीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटेन ने संयुक्त रूप से द हेग में आयोजित एक सीईओ गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया, जिसमें ऊर्जा, बंदरगाह, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और तकनीक जैसे क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियां शामिल थीं। इस दौरान मोदी ने डच कंपनियों को भारत में, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, समुद्री अवसंरचना, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री ने भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और सुधार-आधारित कारोबारी माहौल पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यवसाय सुगमता बढ़ाने के लिए भारत ने कर प्रणाली, श्रम कानूनों और प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।उन्होंने कहा, “आज का भारत विशालता और स्थिरता का प्रतीक है।” आगे उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और यहां वैश्विक स्तर की सबसे बड़ी प्रतिभाशाली कार्यबलों में से एक उपलब्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने डच कंपनियों से भारत में अपने विस्तार को बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत विनिर्माण, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।

इस दौरे के दौरान मोदी और जेटेन ने ढोलेरा में भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट को समर्थन देने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच हुए समझौते पर हस्ताक्षर होते हुए देखे। दोनों नेताओं ने यूरोपीय यूनियन-भारत मुक्त व्यापार समझौते के जल्द क्रियान्वयन का समर्थन किया और हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, तकनीक तथा उन्नत विनिर्माण पर विशेष ध्यान देते हुए भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने की योजना की घोषणा की।

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