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Tuesday, April 14, 2026
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पेट की चर्बी कम करने में कारगर उपविष्ठ कोणासन, रीढ़ की हड्डी होती है मजबूत

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योग स्वस्थ जीवनशैली का जरूरी हिस्सा है। यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। खासतौर पर हठ योग के कुछ आसन ऐसे हैं, जो शरीर के कई हिस्सों पर एक साथ काम करते हैं। इन्हीं में से एक है उपविष्ठ कोणासन।

यह आसन देखने में सरल लग सकता है, लेकिन इसे सही तरीके से करना बेहद जरूरी है, तभी इसके पूरे लाभ मिल पाते हैं।

उपविष्ठ कोणासन का अभ्यास शुरू करने के लिए सबसे पहले जमीन पर सीधा बैठ जाएं और पैरों को सामने की ओर फैलाएं। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों पैरों को जितना आराम से हो सके, उतना चौड़ा करें। सांस को नियंत्रित रखते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं। इस दौरान पीठ को सीधा रखने की कोशिश करें और हाथों को आगे बढ़ाकर पैरों की ओर ले जाएं। इस मुद्रा में कुछ समय रुककर सामान्य सांस लेते रहें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

फायदों की बात करें तो यह आसन सबसे पहले शरीर की मांसपेशियों पर असर डालता है। जब हम पैरों को फैलाकर आगे झुकते हैं, तो जांघों, हैमस्ट्रिंग और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यह खिंचाव मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और उनमें लचीलापन बढ़ाता है। धीरे-धीरे नियमित अभ्यास से शरीर की अकड़न कम होने लगती है और बैठने-उठने में आसानी महसूस होती है।

यह आसन पेट के अंदर मौजूद अंगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। आगे झुकने की प्रक्रिया में पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है। इससे भोजन के पाचन में सुधार आता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

उपविष्ठ कोणासन शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी मदद कर सकता है। जब शरीर इस स्थिति में जाता है, तो पेट और जांघों के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित अभ्यास से इन हिस्सों में फैट बर्निंग की प्रक्रिया तेज होती है।

रीढ़ की हड्डी के लिए भी यह आसन काफी लाभकारी है। इस दौरान जब आप आगे झुकते हैं, तो स्पाइन पर हल्का स्ट्रेच आता है। यह स्ट्रेच रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने के साथ-साथ उसे मजबूत भी बनाता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए यह खासतौर पर उपयोगी माना जाता है।

फेफड़ों की कार्यक्षमता को भी यह आसन बेहतर बनाता है। इस आसन के दौरान नियंत्रित सांस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। इससे सांस लेने की क्षमता मजबूत होती है और शरीर को ज्यादा ऊर्जा मिलती है।

मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह आसन बेहद उपयोगी है। जब शरीर स्थिर स्थिति में रहता है और सांस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। इससे तनाव, चिंता और बेचैनी में कमी आती है और आप खुद को ज्यादा रिलैक्स महसूस करते हैं।

लेकिन अगर आपको पीठ, कंधे या पैरों में गंभीर दर्द है तो इस आसन को न करें।

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