कूचबिहार में ‘कट मनी’ वापसी की अनोखी मुहिम, TMC नेता को लाउडस्पीकर से रोज दिलाई जा रही याद

4 जून तक पैसा लौटाने का वादा, गांव वालों ने शुरू किया सार्वजनिक ऐलान; समयसीमा चूकी तो नए आंदोलन की चेतावनी

कूचबिहार में ‘कट मनी’ वापसी की अनोखी मुहिम, TMC नेता को लाउडस्पीकर से रोज दिलाई जा रही याद

A unique campaign to return cut money in Cooch Behar, with loudspeakers reminding TMC leaders daily.

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में ग्रामीणों ने TMC नेताओं द्वारा वसूल की गई “कट मनी” वापस लेने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लाभार्थियों से वसूली गई कथित रकम 4 जून तक लौटाने का वादा किए जाने के बाद ग्रामीण अब पूरे गांव में लाउडस्पीकर के जरिए रोजाना उस वादे की याद दिला रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है ताकि नेता अपना वादा भूल न जाएं। कूचबिहार दक्षिण के घुघुमारी ग्राम पंचायत क्षेत्र के बूथ संख्या 173 में लगातार लाउडस्पीकर से घोषणाएं की जा रही हैं, जिनमें 4 जून की समयसीमा का उल्लेख किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में “कट मनी” शब्द लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसका इस्तेमाल उन कथित कमीशनों के लिए किया जाता है, जो सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या विकास कार्यों की स्वीकृति सुनिश्चित करने के नाम पर स्थानीय स्तर पर वसूले जाने के आरोपों से जुड़ा रहा है।

विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया मामला

मामला तब सुर्खियों में छाया ग्रामीणों ने स्थानीय TMC पंचायत सदस्य ज्योत्स्ना बर्मन के घर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक की रकम वसूली गई थी।

ग्रामीणों का दावा है कि पिछली TMC सरकार के दौरान कई परिवारों ने भविष्य की किस्तों में देरी या योजना से वंचित किए जाने के डर से यह रकम देने के लिए मजबूर महसूस किया। उनका आरोप है कि लाभ प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर कमीशन देना पड़ता था।

पोस्टर और मार्च के जरिए भी दबाव

लाउडस्पीकर घोषणाओं के अलावा ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर रैलियां भी निकालीं। इन पोस्टरों और नारों के माध्यम से ज्योत्स्ना बर्मन को उनके उस वादे की याद दिलाई जा रही है, जिसमें उन्होंने 4 जून तक सभी प्रभावित लोगों को पैसा लौटाने का आश्वासन दिया था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ग्रामीणों का आंदोलन तब अस्थायी रूप से स्थगित हुआ जब ज्योत्स्ना बर्मन और अन्य स्थानीय नेताओं ने कथित रूप से आश्वासन दिया कि सभी लाभार्थियों को उनकी रकम वापस कर दी जाएगी।

सत्ता परिवर्तन के बाद तेज हुआ आंदोलन

हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने TMC के 15 वर्षों के शासन का अंत करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसके बाद कई ग्रामीण इलाकों में लोगों ने साहस के साथ TMC नेताओं की गुंडई और वसुलीबाजी के खिलाफ मोर्चे खोलें है। सत्ता परिवर्तन के बाद ग्रामीणों ने कथित तौर पर वसूली गई रकम वापस कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया।

4 जून तक स्थिति पर नजर रखेंगे और यदि निर्धारित समयसीमा तक पैसा वापस नहीं किया गया तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि वादा पूरा नहीं होने पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

फिलहाल पूरे इलाके में लाउडस्पीकर से रोजाना हो रही घोषणाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। गांव वालों का कहना है कि यह उनके अधिकारों की लड़ाई है और वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कथित रूप से वसूली गई पूरी रकम लाभार्थियों को वापस नहीं मिल जाती।

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