मौलाना महमूद मदनी ने ईद को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “कुर्बानी इस्लाम की एक महत्वपूर्ण इबादत है, जो हर साहिबे हैसियत मुसलमान पर वाजिब है। कुर्बानी के दिनों में इसका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए प्रत्येक साहिबे हैसियत मुसलमान अपने हिस्से की कुर्बानी अदा करने का हर संभव प्रयास करे।”
मौलाना ने अपील की है कि कुर्बानी करने वाले सभी लोग सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पूर्णतः पालन करें। कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से पूर्णतः परहेज किया जाए।
उन्होंने कहा, “साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों या नालियों में हरगिज न फेंका जाए, बल्कि उन्हें प्लास्टिक बैग आदि में सुरक्षित रखकर निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
मौलाना महमूद मदनी ने अपने बयान में कहा है, “जानवरों की खरीद-फरोख्त तथा उनके परिवहन के दौरान सभी कानूनी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया जाए। साथ ही कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से पूरी तरह बचा जाए।
इसके साथ ही, मुस्लिमों से अपील की गई है कि अगर किसी स्थान पर कुर्बानी में किसी प्रकार की रुकावट या कठिनाई उत्पन्न हो रही हो, तो तत्काल जमीयत उलेमा-ए-हिंद अथवा उसकी स्थानीय इकाइयों से संपर्क किया जाए।
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