भारत और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने अब भारतीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। खासतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच1बी वीजा फीस बढ़ाए जाने के फैसले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कदम पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया था।
खड़गे ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई के बाद ट्रंप ने जो तोहफे दिए हैं, उनसे भारतीय आहत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गले मिलना और खोखले नारे विदेश नीति नहीं होते। विदेश नीति का मकसद राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और संतुलन के साथ मित्रता को आगे बढ़ाना होना चाहिए।
खड़गे के इस बयान पर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विदेशी दबाव का सामना करने के बजाय सरकार को दोषी ठहराना गलत है और इससे भारत की वैश्विक स्तर पर स्थिति कमजोर होती है। सिब्बल ने लिखा कि ट्रंप ने यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और मैक्सिको जैसे अपने सहयोगी देशों के साथ भी और भी खराब व्यवहार किया है।
सिब्बल की इस टिप्पणी को भाजपा ने तुरंत भुनाया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि कंवल सिब्बल एक विद्वान और प्रखर राजनयिक हैं। वह अपने सटीक और गंभीर विचारों के लिए जाने जाते हैं। रिजिजू ने कहा कि राजनीति के लिए पर्याप्त समय और जगह है, लेकिन जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो सभी को भारत के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।
रिजिजू ने एक्स पर लिखा कि वह सिब्बल के दर्द को समझ सकते हैं। इसी पीड़ा ने उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने के लिए मजबूर किया। इस पूरे विवाद से साफ है कि एच1बी वीजा विवाद अब केवल कूटनीतिक नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति में भी एक अहम मुद्दा बन गया है।
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