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कर्नाटक: मुख्यमंत्री पद को लेकर भ्रम में राज्य सरकार, सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मांगी स्पष्टता !

हालांकि कांग्रेस पार्टी यही बता रही है कीसत्ता साझा करने को लेकर ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था और सिद्धारमैया पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।

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कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पार्टी सांसद राहुल गांधी से मुलाकात का अनुरोध करते हुए स्थिति पर स्पष्टता मांगी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के कारण राज्य सरकार में लगातार भ्रम की स्थिति बनने की बात कही है।

सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मिलने की इच्छा जताते हुए कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव को लेकर फैली अफवाहों के चलते असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व तनाव को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बार-बार किसी भी आंतरिक संकट से इनकार करता रहा है।

पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेतृत्व संघर्ष की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी हाईकमान के स्तर पर कोई भ्रम नहीं है। उन्होंने कहा था,  “हाईकमान ने कोई भ्रम पैदा नहीं किया है, यदि कोई आंतरिक मुद्दा है तो उसे राज्य नेतृत्व को ही सुलझाना चाहिए।” खरगे ने पार्टी नेताओं को कर्नाटक में कांग्रेस की चुनावी जीत का व्यक्तिगत श्रेय लेने से भी आगाह किया था और कहा था कि यह सफलता दशकों से पार्टी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ही लगातार मतभेदों की खबरों को नकारते आए हैं। सिद्धारमैया का कहना है कि उन्हें पार्टी नेतृत्व का पूरा भरोसा हासिल है और वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने किसी भी रोटेशनल मुख्यमंत्री व्यवस्था के दावों को खारिज किया है।

वहीं, डीके शिवकुमार ने भी मतभेदों की चर्चाओं को मीडिया की अटकलें और विपक्षी प्रचार बताया है। उन्होंने पहले कहा था, “क्या मुख्यमंत्री और मैं भाइयों की तरह काम नहीं कर रहे? मुझे किसी भी कांग्रेस नेता से कोई मतभेद नहीं है। पार्टी नेतृत्व उचित समय पर फैसला लेगा, जिसे दोनों नेता स्वीकार करेंगे।”

दरअसल, यह चर्चा एक कथित आंतरिक समझौते को लेकर है, जिसके तहत सिद्धारमैया और शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद ढाई-ढाई साल के लिए साझा करना था। सिद्धारमैया ने 20 मई, 2023 को शपथ ली थी और सरकार के कार्यकाल का आधा समय पूरा होने पर पिछले साल 20 नवंबर के आसपास नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद थी। ऐसा न होने पर शिवकुमार समर्थक कुछ विधायकों ने अपनी मांगें तेज कीं और दिल्ली पहुंचकर पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की।

हालांकि, कांग्रेस पार्टी यही बता रही है कीसत्ता साझा करने को लेकर ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था और सिद्धारमैया पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। विधायकों के दिल्ली जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा था कि गुटबाजी उनके स्वभाव में नहीं है और उन्होंने फिर दोहराया कि सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने कहा था,“सभी 140 विधायक मेरे विधायक हैं। गुट बनाना मेरे खून में नहीं है।”

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