कतर विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ”कतर का कहना है कि यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों देश अपने मतभेदों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, इससे क्षेत्र और पूरी दुनिया में लंबे समय तक शांति और आर्थिक विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कतर के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान, क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय पक्षों के प्रयासों की भी सराहना की है, जिन्होंने तनाव कम करने और दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को दूर करने में मदद की। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप यह समझौता हुआ।
मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के अगले चरण के लिए एक मजबूत आधार है। उसने सभी पक्षों से सकारात्मक सोच बनाए रखने, बातचीत में सहयोग करने और मिलकर काम करने की अपील की, ताकि इस प्रक्रिया से स्थायी और व्यापक समाधान निकल सके।
कतर ने दोहराया कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। कतर ने कहा कि बातचीत, शांतिपूर्ण तरीकों, अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों के आधार पर समस्याओं का समाधान निकालना जरूरी है। इससे सहयोग, विकास और समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे और क्षेत्र तथा दुनिया के लोगों के साझा हित पूरे होंगे।
फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।
ट्रंप ने कहा, “रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।”
ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।
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