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समझौते के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने, 9 जून को होगी पहली वार्ता!

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का वह स्वागत करता है। यह क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पर्वतीय रिसॉर्ट में बैठक की योजना बना रहे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह बैठक उनके समझौते को लागू करने के लिए शुरुआती बातचीत के तौर पर होगी।
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का वह स्वागत करता है। यह क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फिलहाल बैठक के एजेंडे और अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी जा सकती।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ हुए इस समझौते का जोरदार बचाव किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बताया, जिसके कारण मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका टल गई, होर्मुज स्‍ट्रेट फिर से खुल गया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोका जा सका।

फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।

ट्रंप ने कहा, “रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।”

उन्होंने कहा क‍ि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।”

ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ शर्तों के साथ अमेरिका ईरान के सिविलियन परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार कर सकता है। यह अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक माना जा रहा है कि वॉशिंगटन आगे ईरान के साथ बातचीत को किस दिशा में ले जा सकता है।

जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान नए समझौते का पालन करता है, तो क्या उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, तो ट्रंप ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है।

उन्होंने कहा, “मैं उनसे हमेशा कहता रहा हूं कि दुनिया में आपके पास शायद तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर आपको परमाणु ऊर्जा की जरूरत ही क्या है?”

उन्होंने कहा क‍ि बिजली उत्पादन के लिए कुछ हद तक परमाणु ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है।

ट्रंप ने कहा कि वह लंबे समय से ईरान के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि देश के पास पहले से ही तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं।

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