भारत के अंतरिक्ष अभियान को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और अन्य गगन यात्रियों को रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राजनाथ सिंह ने शुभांशु शुक्ला की उस अनोखी उपलब्धि की सराहना की, जिसमें उन्होंने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मेथी और मूंग जैसी फसलों की खेती की थी।
रक्षा मंत्री ने हंसते हुए कहा, “आपके अंदर का किसान अंतरिक्ष में जाकर भी बाहर नहीं निकला। भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है, पर कोई किसान अंतरिक्ष में जाकर खेती करेगा, ऐसा तो कभी सोचा भी न था।” उन्होंने जोर दिया कि यह अनुभव भारत के आगामी अंतरिक्ष अभियानों के लिए अमूल्य साबित होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने कहा कि चाहे राह कितनी भी कठिन क्यों न हो, यदि हृदय में श्रद्धा और कर्म में शक्ति हो, तो आकाश भी हमारी सीमा नहीं रह जाता। उनके मुताबिक, शुभांशु भले ही वायुसेना की वर्दी पहनते हों, लेकिन अंतरिक्ष में जाने के बाद वे केवल सैन्य बल या भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के प्रतिनिधि बन गए।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि आज भारत चंद्रमा से लेकर मंगल तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और गगनयान मिशन के लिए भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम इसे केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखते, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय है, जहां हम विश्व की बड़ी स्पेस पावर्स के बीच पूरे गर्व से खड़े हैं।”
राजनाथ सिंह ने याद दिलाया कि अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय आकांक्षाओं और वैश्विक दृष्टि का प्रतीक है। संचार उपग्रहों से लेकर मौसम की निगरानी और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने तक, अंतरिक्ष तकनीक आज भारत के गांव-गांव और खेत-खेत तक सेवा पहुंचा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में जब वे इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन गए थे तो वहां की ट्रेनिंग और उपकरणों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि शुभांशु शुक्ला ने अपनी मेहनत और लगन से एस्ट्रोनॉट्स की सामान्य 2 से ढाई साल की ट्रेनिंग को मात्र ढाई महीनों में पूरा कर दिखाया, जो भारत की जिजीविषा और परिश्रम का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री ने अंत में कहा कि यह उपलब्धि केवल विज्ञान की विजय नहीं, बल्कि विश्वास की गूंज है। यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि साधना का संदेश है। यह केवल भारत का गौरव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन को भी याद किया कि यह अंतरिक्ष यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक शुरुआत है, और भारत को अभी इस क्षेत्र में लंबी दूरी तय करनी है।
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