“सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही AAP सरकार,कोर्ट ने सामूहिक हत्या की अनुमति नहीं दी”

भगवंत मान के ‘आवारा कुत्ते हटाओ अभियान’ पर भाजपा नेता तजिंदर बग्गा का खुलासा

“सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही AAP सरकार,कोर्ट ने सामूहिक हत्या की अनुमति नहीं दी”

"The AAP government is distorting the Supreme Court order; the court did not allow mass murder."

पंजाब में आवारा कुत्तों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राज्यभर में आवारा और “खतरनाक” कुत्तों के खिलाफ बड़े अभियान की घोषणा के बाद भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंग बग्गा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद पंजाब सरकार राज्यभर में आवारा और किलर डॉग्स को हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करेगी। उन्होंने लिखा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब सरकार कल से बच्चों और राहगीरों की जान को खतरा पैदा करने वाले आवारा और खतरनाक कुत्तों को खत्म करने के लिए बड़ा अभियान शुरू करेगी।” साथ ही उन्होंने इस फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद भी किया।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भगवंत मान को “दरूबाज़” कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल आवारा कुत्तों के सामूहिक सफाए को उचित ठहराने के लिए कर रही है। बग्गा ने X पर लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने ‘सभी आवारा कुत्तों को खत्म करने’ का कोई आदेश नहीं दिया है। यह आदेश केवल उन कुत्तों पर लागू होता है जो रेबीज से संक्रमित हों, लाइलाज बीमार हों या विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों द्वारा खतरनाक और आक्रामक घोषित किए गए हों। वह भी केवल PCA Act और ABC Rules 2023 के तहत। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़कर कुत्तों की सामूहिक हत्या का औचित्य साबित करना खुली गलत सूचना है। शर्मनाक।”

साथ ही भाजपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट को ईमेल के जरिए आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री द्वारा गलत सुचना फैलाने के आरोप लगाए है। उन्होंने x पर जानकारी देते हुए लिखा, मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सार्वजनिक रूप से गलत तरीके से पेश किए जाने के संबंध में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश को औपचारिक रूप से पत्र लिखा है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल उन विशिष्ट और कानूनी रूप से परिभाषित मामलों में कार्रवाई की अनुमति देता है, जिनमें रेबीज़ से पीड़ित, लाइलाज बीमारी वाले या स्पष्ट रूप से खतरनाक कुत्ते शामिल हों; और वह भी पशु चिकित्सकों की जांच के बाद और कानून के दायरे में रहते हुए।यह किसी भी तरह के व्यापक और सामूहिक रूप से कुत्तों को खत्म करने के अभियान को अधिकृत नहीं करता है।

यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि नसबंदी या टीकाकरण के बाद भी ऐसे कुत्तों को संवेदनशील क्षेत्रों में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा था, “हमने 7 नवंबर के फैसले को वापस लेने की मांग करने वाली याचिकाओं पर विस्तार से विचार किया, लेकिन सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि कुत्तों के हमलों की घटनाएं अब स्कूलों, आवासीय कॉलोनियों, एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थलों तक फैल चुकी हैं। अदालत ने बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों पर हमलों की कई बेहद चिंताजनक घटनाओं का भी उल्लेख किया।

हालांकि, पशु अधिकार संगठनों ने सरकारों को चेतावनी दी है कि किसी भी कार्रवाई में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और पशु जन्म नियंत्रण नियम का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। फिलहाल पंजाब सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रस्तावित अभियान को जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा।

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