उन्होंने कहा कि विशेष सत्र को लेकर विपक्ष को कुछ जानकारी नहीं दी गई थी। एक दिन पहले मसौदा सार्वजनिक किया गया, जिससे विपक्ष को समय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल से जो साजिश रची गई कि किसी ना किसी तरह से हमें सत्ता में रहना है, अगर अभी नहीं किया तो 2029 में करेंगे ताकि सदैव सत्ता में रहें। उन्हें लगता था कि पारित हो गया तो हमेशा सत्ता में बने रहेंगे, नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी कहेंगे और महिलाओं के सामने उनके मसीहा बन जाएंगे। लेकिन महिलाएं सब समझती है।
उन्होंने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी, ये परिसीमन की बात थी। बिना जाति के आंकड़े देखे इनको परिसीमन करना था और अपनी मनमानी करने की पूरी स्वतंत्रता चाहिए थी। ये मुमकिन नहीं था कि विपक्ष उनका साथ दे। उन्होंने कहा कि देश ने देखा कि जब विपक्ष एकजुट हो जाता है, तो किस तरह से इनको हराया जाता है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि इनके (सरकार) लिए ब्लैक डे हैं, क्योंकि इन्हें पहली बार झटका लगा है। महिलाओं की समस्याएं बहुत ज्यादा बढ़ रही हैं, संघर्ष बढ़ रहा है। महिलाएं सबकुछ देख रही हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में सर्वसम्मति से जो पास हुआ था, उसको लेकर आइए और महिलाओं को हक दीजिए। उन्होंने कहा कि 543 सीटों में से ही 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दीजिए। हम कोई क्रेडिट नहीं ले रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की जनता के पास विवेक है। अगर इनको देशभर में अभियान करना है, तो खुलकर करें। लेकिन आज देश उस परिस्थिति में नहीं है, जो 12 साल पहले था। ये समझ नहीं पा रहे हैं कि भारत बदल गया है। जनता का भरोसा इनसे उठ रहा है।
परिसीमन को लेकर प्रियंका गांधी ने कहा कि हमारा स्टैंड क्लियर है। पूरे गठबंधन ने स्टैंड क्लियर कर दिया है। हम यही समझ पा रहे हैं कि ये जो विधेयक लाया गया और तीन दिनों तक चर्चा चली, ये महिला आरक्षण की नहीं थी, ये परिसीमन पर ही थी। इसको लेकर हम सबने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले चुनाव में 33 प्रतिशत महिलाएं चुनाव लड़ेंगी।
उन्होंने कहा कि परिसीमन से पहले जाति जनगणना हो और उसके आधार पर करें। इनकी कोशिश परिसीमन आयोग बनाने की है, जिसमें तीन अपने लोग रखेंगे, जैसे इन्होंने बाकी सभी आयोग बनाए हैं।



