इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के खिलाड़ी चयन प्रणाली को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने मौजूदा नीलामी पद्धती से खिलाड़ियों खरीदने को खत्म कर ड्राफ्ट प्रणाली अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों की नीलामी उन्हें कमोडिटी की तरह पेश करती है, जो सम्मानजनक नहीं है।
रॉबिन उथप्पा दो बार आईपीएल चैंपियन रह चुके हैं और 2007 T20 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा है, “हमें क्रिकेट में ऑक्शन सिस्टम बंद कर देना चाहिए… आज के समय में इंसानों को वस्तुओं की तरह बेचना ठीक नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि मनोरंजन की एक सीमा होती है और अब उसे पार किया जा रहा है।
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जानें कैसा है अमेरिकी लीग्स का ड्राफ्ट सिस्टम
दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीग्स में अमेरिका का दबदबा है। नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल), नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए), मेजर लीग बेसबॉल (एमएलबी) और नेशनल हॉकी लीग (एनएचएल) इन सभी में ड्राफ्ट सिस्टम लागू होता है।
इस प्रणाली में नए खिलाड़ियों को ड्राफ्ट के जरिए टीमों में शामिल किया जाता है। खास बात यह है कि पिछली सीजन में खराब प्रदर्शन करने वाली टीमों को पहले चयन का मौका मिलता है, ताकि प्रतिस्पर्धा में संतुलन बना रहे।
साथ ही NFL, NBA और NHL में सैलरी कैप लागू होता है, जिससे टीमें एक तय सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकतीं। हालांकि MLB में खर्च पर कोई सख्त सीमा नहीं है।
यूरोपीय फुटबॉल का ओपन मार्केट मॉडल
अमेरिकी मॉडल के विपरीत, यूरोप की फुटबॉल लीग्स पूरी तरह अलग प्रणाली अपनाती हैं। प्रीमियर लीग, ला लीगा, बुंडेसलीगा और सीरी ए जैसी बड़ी लीग्स में ओपन मार्केट सिस्टम होता है।
इसमें क्लब सीधे खिलाड़ियों या उनके क्लब से बातचीत कर खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट तय करते हैं। यहां सैलरी कैप नहीं होता, जिससे आर्थिक रूप से मजबूत क्लब शीर्ष खिलाड़ियों को आसानी से खरीद लेते हैं। हालांकि कुछ वित्तीय नियम और स्क्वॉड लिमिट्स जरूर लागू होती हैं। इसके अलावा, साल में दो बार FIFA द्वारा निर्धारित ट्रांसफर विंडो खुलती है, जो फुटबॉल जगत में काफी रोमांच और हलचल पैदा करती है।
IPL में क्या हो सकता है बदलाव?
IPL का मौजूदा ऑक्शन सिस्टम इसे अन्य लीग्स से अलग बनाता है, जहां खिलाड़ी खुले मंच पर बोली के जरिए टीमों में जाते हैं। उथप्पा की टिप्पणी ने इस बात पर बहस तेज कर दी है कि क्या अब समय आ गया है कि IPL भी ड्राफ्ट सिस्टम की ओर बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राफ्ट सिस्टम से प्रतिस्पर्धा संतुलित हो सकती है और खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बन सकती है। वहीं, ऑक्शन सिस्टम समर्थकों का तर्क है कि इससे लीग की लोकप्रियता और पारदर्शिता बढ़ती है। फिलहाल, यह बहस जारी है कि क्या IPL अपने मौजूदा ढांचे को बदलेगा या ऑक्शन मॉडल के साथ ही आगे बढ़ेगा।
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