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अगस्त क्रांति मैदान में ईद की नमाज़ के आयोजन के खिलाफ मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा का विरोध

मैदान को राजनीतिक, सांस्कृतिक और देशभक्ति की भावना से जोड़कर देखा जाता है।

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मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में 7 जून को ईद की नमाज़ पढ़ने के लिए दायर एक याचिका ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त से अनुमति खारिज करने की अपील की है।

लोढ़ा ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा, “7 जून को अगस्त क्रांति मैदान में ईद की नमाज़ आयोजित करने की अनुमति मांगने के लिए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है — यह एक ऐसा स्थल है जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक के रूप में गहरा ऐतिहासिक महत्व रखता है। मैंने औपचारिक रूप से मुंबई पुलिस आयुक्त से इस अनुरोध को अस्वीकार करने का आग्रह किया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “इस पवित्र मैदान पर इस तरह के आयोजन की अनुमति देना इसकी विरासत को बहुत कमज़ोर करेगा। इस तरह का आवेदन भी शर्मनाक है — इस पर विचार करना तो दूर की बात है!”

अगस्त क्रांति मैदान, जिसे गोवालिया टैंक मैदान के नाम से भी जाना जाता है, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक शुरुआत का केंद्र रहा है। यही वह स्थल है, जहां से महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया था।

मंत्री लोढ़ा ने अपनी आपत्ति को विरासत और राष्ट्रीय गौरव के मसले से जोड़ते हुए कहा कि, “इतिहास के ऐसे गवाह स्थान पर इस तरह की इजाज़त देना उसकी पवित्रता को ठेस पहुंचाना है। इस मैदान को राजनीतिक, सांस्कृतिक और देशभक्ति की भावना से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे स्थानों को धार्मिक या निजी आयोजनों से अलग रखा जाना चाहिए।”

फिलहाल, यह याचिका हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है और कोर्ट द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है। आयोजकों की ओर से इस याचिका में यह तर्क दिया गया है कि आयोजन शांति और भाईचारे के साथ एकत्र होने के उद्देश्य से किया जाना है और कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

हालांकि, इस मुद्दे पर सियासी गर्मी बढ़ती नजर आ रही है। एक तरफ आयोजन के समर्थक इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार से जोड़ रहे हैं, तो वहीं विरोधी इसे ऐतिहासिक धरोहर के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि अदालत इस याचिका पर क्या निर्णय देती है और मुंबई पुलिस प्रशासन इस मसले को कैसे संभालता है। लेकिन इतना तय है कि ईद की नमाज़ को लेकर यह मामला सिर्फ एक आयोजन से ज्यादा, धार्मिक और राष्ट्रीय प्रतीकों के टकराव का केंद्र बन गया है।

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