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Tuesday, April 21, 2026
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‘एक्वा योग’ से बेहतर सेहत, शरीर स्वस्थ और मन को मिले शांति

एक्वा योग के दौरान लोग पद्मासन, शीर्षासन, शवासन, पश्चिमोत्तानासन और बकासन जैसे आसनों का अभ्यास पानी में करते हैं। एक्वा योग योग की एक आधुनिक शैली है जिसमें योगासन स्वीमिंग पूल में किए जाते हैं।

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पारंपरिक योग को पानी के साथ जोड़कर किया जाने वाला ‘एक्वा योग’ इन दिनों स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। स्वीमिंग पूल या पानी में योगासन करने के शारीरिक व मानसिक अनगिनत लाभ हैं।

एक्वा योग के दौरान लोग पद्मासन, शीर्षासन, शवासन, पश्चिमोत्तानासन और बकासन जैसे आसनों का अभ्यास पानी में करते हैं। एक्वा योग योग की एक आधुनिक शैली है जिसमें योगासन स्वीमिंग पूल में किए जाते हैं। पानी की उत्प्लावन (उछाल) शरीर का वजन कम कर देती है, जिससे जोड़ों पर बहुत कम दबाव पड़ता है। इससे व्यायाम आसान और सुरक्षित हो जाता है। विशेष रूप से गठिया, जोड़ों के दर्द, सर्जरी के बाद रिकवरी या बुजुर्गों के लिए यह बेहद फायदेमंद है।

एक्वा योग शरीर की थकान को मिटाकर राहत देता है पानी में योग करने से जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव नहीं पड़ता। इससे लचीलापन बढ़ता है और स्ट्रेचिंग आसानी से हो पाती है। पानी में सांस लेने का तरीका सुधरता है। इससे न्यूरो संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। पानी का शीतल स्पर्श मन को शांत करता है।

तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं में कमी आती है। इसके नियमित अभ्यास से इम्युनिटी मजबूत होती है, रक्त संचार सुधरता है और थकान कम होती है। पानी का प्रतिरोध मसल्स को अच्छा व्यायाम देता है। इससे शरीर टोन होता है और वजन नियंत्रण में भी मदद मिलती है।

योग विशेषज्ञों का कहना है कि एक्वा योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी है। पानी में योग नींद सुधारने में भी मदद करता है। यह न केवल शारीरिक फिटनेस देता है बल्कि मन की शांति और समग्र स्वास्थ्य भी प्रदान करता है।

एक्वा योग के साथ ही जल का इस्तेमाल कर कई रोगों का भी इलाज किया जाता है, जिसे हाइड्रोथेरेपी कहा जाता है। यह न केवल माइग्रेन बल्कि शरीर के दर्द, सूजन और तनाव में भी राहत देने में कारगर है। जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द और कई अन्य शारीरिक व मानसिक रोगों में भी कारगर साबित हुई है।

हाइड्रोथेरेपी शरीर की प्राकृतिक जीवन शक्ति को बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती है। जब नींद, खान-पान, व्यायाम जैसी आदतें बिगड़ती हैं, तो शरीर कमजोर पड़ जाता है। हाइड्रोथेरेपी पानी के जरिए शरीर को डिटॉक्स करती है, रक्त संचार सुधारती है, मांसपेशियों को आराम देती है और सूजन कम करती है।

इस थेरेपी में गर्म पानी में स्नान, ठंडे पानी के पैक, स्टीम बाथ, पूल में व्यायाम या सिर पर बर्फ की मालिश जैसी विधियां शामिल हैं। एक अध्ययन में पुराने माइग्रेन के मरीजों पर हाइड्रोथेरेपी का असर देखा गया। 40 मरीजों को दो समूहों में बांटा गया।

एक समूह को दवाओं के साथ हाइड्रोथेरेपी (गर्म पानी में हाथ-पैर डुबोना और सिर पर बर्फ की मालिश) दी गई, जबकि दूसरे को सिर्फ दवाएं। 45 दिनों बाद हाइड्रोथेरेपी वाले समूह में सिरदर्द की आवृत्ति, तीव्रता और प्रभाव में काफी कमी आई। साथ ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ, जिससे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम बेहतर हुआ।

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