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Wednesday, October 21, 2026
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गरीबी 39% पर पहुँची: पाकिस्तान तेजी से कंगाली की ओर

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पाकिस्तान में आर्थिक संकट अब भयावह स्तर पर पहुँच चुका है। लगातार दो दशकों तक घटती रही गरीबी दर अब उलट दिशा में बढ़ते हुए 39 प्रतिशत तक जा पहुँची है। बांग्लादेशी मीडिया पोर्टल Lens Asia की रिपोर्ट के अनुसार, बीते वर्षों में करीब 1.25 करोड़ (12.5 मिलियन) नए लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं।

यह गिरावट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से जारी कुप्रबंधन, संरचनात्मक अक्षमताओं और पर्यावरणीय तबाही का सम्मिलित परिणाम मानी जा रही है। 2020 से 2025 के बीच पाकिस्तान ने तेज मुद्रास्फीति, घटती प्रति व्यक्ति आय, और ठप पड़ते औद्योगिक क्षेत्रों का सामना किया है। लगातार बढ़ती ऊर्जा कीमतें और महंगाई ने आम परिवारों की आर्थिक स्थिति को जकड़ लिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024–25 में हर तीन में से एक बच्चा स्कूल से बाहर है, और लड़कियों में शिक्षा से वंचित होने की दर सबसे अधिक है। यह स्थिति पाकिस्तान के दीर्घकालिक उत्पादकता आधार को कमजोर कर रही है और गरीबी के दुष्चक्र को और गहराती जा रही है।

पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में सर्कुलर डेट (circular debt) यानी बिजली उत्पादन कंपनियों का बकाया कर्ज अब 2.4 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच चुका है, जो देश के GDP का लगभग 2.1 प्रतिशत है।

यह ऋण उस बिजली की अदायगी से जुड़ा है जो पहले ही उपभोग की जा चुकी है, पर उसका भुगतान नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, 1990 के दशक से बने स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPPs) के अनुबंधों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।

इन अनुबंधों में अमेरिकी डॉलर में गारंटीड प्रॉफिट, कैपेसिटी चार्ज और टेक-ऑर-पे क्लॉज जैसी शर्तें हैं, जिनके कारण सरकार को बिजली की वास्तविक मांग से अलग भुगतान करना पड़ता है। सरकारी जांच में पाया गया कि IPPs ने 1,000 अरब रुपये तक के अतिरिक्त मुनाफे अर्जित किए, लेकिन सरकार ने धन वापसी की जगह जनता पर करों का बोझ डाल दिया।

गरीबी को कम करने के बजाय पाकिस्तान की राजकोषीय नीतियों ने उसे और बढ़ाया है। अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी ने गरीब तबके को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र विकास कार्यक्रम (PSDP) में कटौती से रोजगार और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा।

बाढ़ग्रस्त बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध के जिलों में हालात सबसे गंभीर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 1.18 करोड़ लोग इस सर्दी के मौसम में तीव्र खाद्य असुरक्षा से जूझेंगे, जिनमें 22 लाख लोग आपातकालीन स्तर (IPC Phase 4) में होंगे। भारी वर्षा और पशु रोगों के प्रकोप ने कृषि और पशुपालन दोनों को बर्बाद कर दिया है।

सितंबर 2025 तक पाकिस्तानी रुपये की दर 282.01 प्रति डॉलर रही है, जो सतही तौर पर स्थिर दिखती है। लेकिन यह स्थिरता वास्तविक नहीं, बल्कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की आक्रामक दखलअंदाजी का परिणाम है।

केंद्रीय बैंक ने पिछले नौ महीनों में 9 अरब डॉलर बाजार से खरीदकर कृत्रिम स्थिरता बनाई है। विदेशी मुद्रा बाजार में अब 30-40% कारोबार खुद केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे असली मूल्य खोज (price discovery) विकृत हो गई है।

Lens Asia की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पाकिस्तान ने तुरंत और ठोस सुधार नहीं किए, तो गरीबी स्थायी रूप ले लेगी और देश की सामाजिक स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडराएगा।

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