भारत छोड़ रहे पाकिस्तानी नागरिक, मुजफ्फरनगर की शादी में आए मोहम्मद रशीद के घड़ियाली आंसू!

"आम जनता मोहब्बत चाहती है, आतंक का कोई मजहब नहीं होता"

भारत छोड़ रहे पाकिस्तानी नागरिक, मुजफ्फरनगर की शादी में आए मोहम्मद रशीद के घड़ियाली आंसू!

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पहलगाम के इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया था। इस फैसले का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। कई पाकिस्तानी नागरिक जो भारत में वैध वीज़ा पर आए थे, अब बोरिया-बिस्तर समेटकर अपने मुल्क लौट रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है मोहम्मद रशीद की, जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपनी भांजी की शादी में शरीक होने आए थे। वहीं वापस लौटने पर पाकिस्तानी नागरिकों के साथ वह भी घड़ियाली आंसू बहाने लगें है।

रशीद का कहना है कि वह शादी और अपने भाई की बरसी में शामिल होने के लिए डेढ़ महीने रुकने वाले थे, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि महज 15 दिनों में ही उन्हें अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान लौटना पड़ रहा है। मीडिया से बातचीत में रशीद ने कहा—”हमें कश्मीर में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी नहीं थी। जब सुना कि आतंकियों ने निर्दोष लोगों की जान ले ली, तो बहुत दुख हुआ। ये घटनाएं पूरी तरह गलत हैं और कोई भी समझदार इंसान इसका समर्थन नहीं कर सकता।”

मोहम्मद रशीद ने एक बड़ी बात कही—”आतंक फैलाने वालों का कोई मजहब नहीं होता। वो सिर्फ अपने मकसद के लिए नफरत फैलाते हैं और बाकी दुनिया को परेशानी में डाल देते हैं।” रशीद ने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान की आम जनता भारत से नफरत नहीं, मोहब्बत करती है।

रशीद का मानना है की जो भी गलत करेगा—चाहे वो भारत से हो या पाकिस्तान से—उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन आम नागरिक, जो सिर्फ रिश्तेदारी या मानवता के नाते एक-दूसरे देश में आते हैं, उन्हें सजा देना या शक की निगाह से देखना न्यायोचित नहीं है। यहीं मुहम्मद रशीद जैसे छद्म आतंकवाद के समर्थक बातों को गोल करतें है। पहलगाम का हमला पाकिस्तान से वित्त पोषित और विचार पोषित था। इस हमले से भारतीय नागरिकों का नुकसान हुआ है, जिसका खामियाजा पाकिस्तानी नागरिकों को भुगतना होगा।

हालांकि बता दें, पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने 26 हिंदू पुरुषों उनके परिजनों के सामने धर्म पूछकर-कलमा पढ़ने के लिए मजबूर कर गोलियों से भून दिया गया। इस इस्लामिक कट्टरपंथी हिंसा से बंटवारे के समय पाकिस्तान परस्तों ने धर्म देखकर क़त्ल किए लाखों जख्म फिर एक बार ताजा हो रहें है। जिसमें मुहम्मद रशीद जैसे पाकिस्तानी नागरिक तनाव में नुकसान से बचने के लिए झूठी मानवता और आतंक से अलगाव का ढोंग कर रहें है।

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