साकेत भवन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लेकर आए थे, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे रोकने की कोशिश की।
तपस्वी छावनी के प्रमुख परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान और उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
आर्य संत वरुण दास ने इस मुद्दे पर कहा, “संसद में महिला आरक्षण विधेयक गिर गया है। इससे पहले भी कई प्रयास किए गए थे, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से लोकतंत्र और मजबूत होगा।”
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, “हमारे देश की परंपराएं, कानून और व्यवस्थाएं—ये सभी इस बात पर जोर देते हैं कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। महिलाओं को राजनीति में समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकें।”
बता दें कि यह विधेयक महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ाने से संबंधित था। सरकार का प्रयास था कि 2029 तक यह आरक्षण प्रभावी हो सके, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह विफल हो गया।



