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शिक्षा निधि रोके जाने पर केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार !

तीन-भाषा फॉर्मूले सहित NEP के कई प्रावधान तमिलनाडु की द्रविड़ पार्टियां राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य बताती आयी हैं। राज्य सरकार हिंदी थोपे जाने का लंबे समय से विरोध करती रही है।

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तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में वित्तीय दबाव डालने का आरोप लगाते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए समग्र शिक्षा योजना (SSS) के अंतर्गत मिलने वाले 2,291.30 करोड़ रुपये की राशि अवैध रूप से रोक रखी है।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह केंद्र को आदेश दे कि नीति विरोधी होने की सजा के तौर पर राज्यों को वित्तीय रूप से प्रताड़ित न किया जाए। याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर की गई है, जो राज्यों को केंद्र के खिलाफ संवैधानिक या कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर मुकदमा दायर करने की अनुमति देता है।

तमिलनाडु का आरोप है कि केंद्र सरकार ने शिक्षा योजनाओं के तहत फंड जारी करने की शर्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और पीएम-श्री स्कूल योजना के कार्यान्वयन से जोड़ दी है। याचिका में कहा गया है कि राज्य ने PM SHRI योजना के एमओयू में जुलाई 2024 में बदलाव की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया।

राज्य सरकार ने बताया कि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने 16 फरवरी 2024 को तमिलनाडु की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसके बावजूद 21 मई 2025 तक केंद्र से एक भी रुपया जारी नहीं किया गया। इसमें केंद्र का 60% अंश यानी 2,151.59 करोड़ रुपये और 1 मई 2025 से भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज की मांग की गई है।

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि NEP और पीएम-श्री योजना केवल नीति दस्तावेज हैं, कानून नहीं। इसलिए किसी भी राज्य पर इनका अनुपालन थोपना संवैधानिक रूप से गलत और संघीय ढांचे के खिलाफ है। राज्य ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि वह शिक्षा निधियों का उपयोग राज्यों को NEP लागू करने के लिए बाध्य करने के हथियार के रूप में कर रहा है।

तीन-भाषा फॉर्मूले सहित NEP के कई प्रावधान तमिलनाडु की द्रविड़ पार्टियां राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य बताती आयी हैं। राज्य सरकार हिंदी थोपे जाने का लंबे समय से विरोध करती रही है। तमिलनाडु की याचिका को मजबूती मिलती है एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, जिसमें अदालत ने कहा था कि वह अनुच्छेद 32 के तहत किसी राज्य को NEP लागू करने का आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि यह मूल अधिकारों की सुरक्षा के लिए है, न कि राजनीतिक निर्णयों के थोपने के लिए।

तमिलनाडु सरकार ने यह भी मांग की है कि केंद्र के 23 फरवरी और 7 मार्च 2024 को भेजे गए वे पत्र, जिनमें फंड रिलीज को NEP और पीएम-श्री से जोड़ने की बात कही गई थी, असंवैधानिक घोषित कर रद्द किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई आने वाले समय में राज्य-केंद्र संबंधों की दिशा तय कर सकती है।

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