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Friday, November 6, 2026
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“भूगोल में रहना है या इतिहास बनना है तय करे पाकिस्तान”

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की कड़ी चेतावनी। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना प्रमुख का बड़ा बयान, कहा— "आतंकियों को पनाह देना बंद नहीं किया तो पाकिस्तान को परिणाम भुगतने होंगे"

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भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि वह भारत के खिलाफ आतंकियों को पनाह देना जारी रखता है, तो उसे तय करना होगा कि वह “भूगोल का हिस्सा रहना चाहता है या इतिहास बनना चाहता है।”

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह बयान मानेकशॉ सेंटर में आयोजित “Uniform Unveiled” नामक एक इंटरैक्टिव कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम नागरिक-सैन्य संवाद पहल का हिस्सा था। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” की पहली वर्षगांठ मनाई।

सेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा,”… अगर पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना और भारत के खिलाफ काम करना जारी रखता है, तो उन्हें तय करना होगा कि वे भूगोल और इतिहास का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।”

यह टिप्पणी पिछले वर्ष 7 मई को शुरू किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” के संदर्भ में आई। यह सैन्य अभियान पहलगाम में हुए निर्दयतापूर्ण आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में कई लोगों की जान गई थी, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी।

भारतीय सेना द्वारा किए गए इन सटीक हमले के बाद दोनों देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक सैन्य तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी रही। बाद में 10 मई को संघर्ष विराम (ceasefire) लागू होने के बाद स्थिति सामान्य हुई।

कार्यक्रम के दौरान जनरल द्विवेदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और भारत की सैन्य तैयारियों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टोलेरेंस की नीति पर और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है।

सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता जताता रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के आरोप लगाती रही हैं।

ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण जवाबी अभियान माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस अभियान ने यह संदेश दिया कि भारत आतंकवादी हमलों के खिलाफ सीमित लेकिन निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है।

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