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होमदेश दुनिया“अज्ञानी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित चुनिंदा रिपोर्टें पढ़कर सवाल पूछते हैं”

“अज्ञानी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित चुनिंदा रिपोर्टें पढ़कर सवाल पूछते हैं”

मानवाधिकार संबंधी सवालों पर विदेश मंत्रालय के सचिव ने पत्रकार को सुनाई खरी-खोटी

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सोमवार (18 मई) रात नॉर्वे में आयोजित विदेश मंत्रालय की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक नॉर्वेजियन महिला पत्रकार ने भारतीय राजदूत को बार-बार बीच में टोक दिया। इस स्थिति के चलते विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज को तीखी प्रतिक्रिया देनी पड़ी। पत्रकार ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार और मानवाधिकार जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि इन मामलों में भारत पर विश्वास क्यों किया जाना चाहिए। इस पर सख्त जवाब देते हुए जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का बचाव किया और आलोचकों पर आरोप लगाया कि वे देश की व्यापकता और जटिलताओं को समझे बिना अज्ञानी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित चुनिंदा रिपोर्टों के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं।

जॉर्ज ने कहा, “आप जानते हैं कि भारत में कितनी सारी घटनाएं होती रहती हैं। हमारे यहां हर शाम कई ब्रेकिंग न्यूज़ आती हैं। केवल दिल्ली में ही अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में कम से कम 200 टीवी चैनल हैं। लोगों को भारत के विशाल स्वरूप का अंदाज़ा ही नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत के आलोचक कुछ अज्ञानी और अपरिपक्व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित एक-दो रिपोर्टें पढ़ते हैं और फिर उन्हीं के आधार पर सवाल उठाने लगते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए जॉर्ज ने भारत के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है और उनके उल्लंघन की स्थिति में कानूनी उपाय उपलब्ध कराता है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया था, जबकि कई देशों में महिलाओं को यह अधिकार दशकों बाद मिला।

जॉर्ज ने कहा, “हमारे पास एक संविधान है जो लोगों के अधिकारों और मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। हमारे देश में महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं, जो बेहद महत्वपूर्ण है। हमने 1947 में ही अपनी महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया था। मेरी जानकारी के अनुसार, कई देशों में महिलाओं को यह अधिकार भारत की स्वतंत्रता के कई दशक बाद मिला।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की चुनावी लोकतांत्रिक व्यवस्था ही समानता और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है। जॉर्ज ने कहा, “मानवाधिकारों का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है? सरकार बदलने का अधिकार, मतदान का अधिकार और यही भारत में हो रहा है। हमें इस पर बहुत गर्व है।”

यह संवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जारी बहुराष्ट्रीय यूरोप दौरे के तहत नॉर्वे यात्रा के दौरान सामने आया।

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