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Wednesday, May 20, 2026
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ग्रीन टेक्नोलॉजी से ऑफशोर विंड तक, भारत-नॉर्वे के पांच बड़े रणनीतिक समझौते!

समझौते में संयुक्त कार्यशालाएं, रिसर्च एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, वैज्ञानिकों के एक्सचेंज प्रोग्राम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की व्यवस्था शामिल है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने विज्ञान और तकनीक साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते ग्रीन एनर्जी, सतत विकास, समुद्री तकनीक, नवाचार और भू-विज्ञान सहयोग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।

इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग मजबूत करना, उद्योग और स्टार्टअप भागीदारी बढ़ाना, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और सतत विकास परियोजनाओं को तेजी देना है।

सबसे अहम समझौतों में से एक डीएसआईआर/सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और नॉर्वे की रिसर्च काउंसिल ऑफ नॉर्वे (आरसीएन) के बीच हुआ, जिसके तहत रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इनोवेशन और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

समझौते में संयुक्त कार्यशालाएं, रिसर्च एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, वैज्ञानिकों के एक्सचेंज प्रोग्राम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की व्यवस्था शामिल है।

इसके अलावा, सीएसआईआर ने नॉर्वे की प्रमुख स्वतंत्र रिसर्च संस्था एसआईएनटीईएफ के साथ 2026-2029 के लिए एक नया सहयोग समझौता भी किया।

यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी ट्रांजिशन पर केंद्रित होगी, जिसके तहत बायो-बेस्ड मैटेरियल, ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर, स्टोरेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च और इनोवेशन कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के तहत कई सीएसआईआर संस्थानों ने एसआईएनटीईएफ संस्थाओं के साथ समुद्री ऊर्जा और ऑफशोर विंड एनर्जी तकनीकों पर प्रोजेक्ट आधारित सहयोग समझौता किया।

इस सहयोग में सीएसआईआर-स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज, सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी और सीएसआईआर-फोर्थ पैराडाइम इंस्टीट्यूट शामिल हैं।

वहीं नॉर्वे की ओर से एसआईएनटीईएफ ओशन, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्युनिटी इस साझेदारी का हिस्सा होंगे। इस संयुक्त कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की ऑफशोर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को मजबूत करना और देश के नवीकरणीय ऊर्जा तथा कार्बन न्यूट्रैलिटी लक्ष्यों को समर्थन देना है।

इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लोटिंग ऑफशोर विंड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा लागत कम करना, सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड, ईएसजी फ्रेमवर्क, पायलट प्रोजेक्ट, स्किल डेवलपमेंट और औद्योगिक विकास पर काम किया जाएगा।

इस पहल के लिए सीएसआईआर लगभग 3.41 करोड़ रुपए की फंडिंग सहायता देगा।

इसके अलावा, “ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग” शीर्षक से एक संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सीएसआईआर, एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनटीएनयू) के बीच हुआ।

इस घोषणा पत्र में सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकोनॉमी, ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।

इसके तहत छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त रिसर्च गतिविधियां, अकादमिक सेमिनार और साझा शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।​ 

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