भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने रक्षा क्षेत्र में एक बहुत ही ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने भारतीय सेना को देश में ही निर्मित 1000वां टी-90(IM) “भीष्म” (T-90 Bhishma) मुख्य युद्धक टैंक (MBT) सफलतापूर्वक सौंप दिया है। 90 प्रतिशत से भी अधिक स्वदेशी घटकों से लैस यह टैंक भारत की बख्तरबंद वाहनों के निर्माण में लगातार बढ़ती आत्मनिर्भरता का जीता-जागता सबूत है, जो सीधे तौर पर चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर भारतीय सेना की जमीनी मारक क्षमता को कई गुना मजबूत करेगा।
चेन्नई की अवाड़ी फैक्ट्री से हुआ रोल-आउट: 2001 से अब तक का सफर
इस 1000वें टी-90(IM) भीष्म टैंक को 22 मई को चेन्नई के पास अवाड़ी में स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) से हरी झंडी दिखाकर बाहर निकाला गया। भारतीय सेना की रीढ़ माने जाने वाले इस टी-90 टैंक को मूल रूप से रूस से मिले लाइसेंस के तहत भारत में तैयार किया जाता है, लेकिन समय के साथ भारतीय इंजीनियरों ने इसमें विदेशी कल-पुर्जों को हटाकर स्वदेशी तकनीकों को पूरी तरह समाहित कर लिया है।
#AVNL has delivered the 1000th locally produced T-90(IM) tank to the #IndianArmy. pic.twitter.com/o2NeX8XZjM
— News IADN (@NewsIADN) May 22, 2026
इस सफर की शुरुआत साल 2001 में रूस से मिले ‘सेमी-नाक्ड-डाउन’ (SKD) किट्स की असेंबलिंग के साथ हुई थी। इसके बाद साल 2006 में भारत सरकार ने रूस के साथ 1,000 टैंकों के लाइसेंस प्राप्त विनिर्माण के लिए एक बड़ा समझौता किया। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों की मेहनत रंग लाई और साल 2009 तक भारत ने अपनी फैक्ट्री में पहला पूरी तरह से स्वदेशी टी-90एस टैंक तैयार कर लिया, जो रक्षा क्षेत्र के स्थानीयकरण में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर था।
आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पुनर्गठन से लेकर ‘भीष्म’ के इंजन के स्वदेशीकरण तक
साल 2021 में मोदी सरकार द्वारा आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) का पुनर्गठन करके सात नई सरकारी रक्षा कंपनियां बनाई गई थीं, जिनमें से एक आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) है। यही कंपनी अब अवाड़ी की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में टैंक उत्पादन की पूरी देखरेख करती है। इस ऐतिहासिक फैक्ट्री के पास भारतीय सेना के लिए टी-72 ‘अजेय’, अर्जुन एमबीटी, और ‘विजयांत’ जैसे दिग्गज टैंक बनाने का एक लंबा और शानदार अनुभव है।
शुरुआती दौर में जहां सिर्फ आयातित किट्स को जोड़कर टैंक तैयार किए जाते थे, वहीं अब एवीएनएल ने इसके सबसे महत्वपूर्ण प्रणालियों का गहरा स्वदेशीकरणकर लिया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि एवीएनएल ने टी-90 भीष्म को ताकत देने वाले बेहद शक्तिशाली ‘V-92S2’ इंजन का पूरी तरह से भारत में ही निर्माण शुरू कर दिया है। इसके साथ ही टी-72 और बीएमपी-2 (BMP-2) सैन्य वाहनों के इंजनों का भी पूरी तरह स्वदेशीकरण कर लिया गया है। यही नहीं, टैंक के भीतर इस्तेमाल होने वाले पुराने हाइड्रोलिक ड्राइव को हटाकर अब आधुनिक स्वदेशी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक टरेट ट्रैवर्स सिस्टम लगाए गए हैं, जिसने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर भारत की निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है।
रणक्षेत्र का अजेय योद्धा: टी-90 भीष्म की ताकत
टी-90 भीष्म दुनिया के सबसे घातक और आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों में से एक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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मुख्य हथियार: यह टैंक 125 मिमी की स्मूथ-बोर गन से लैस है, जो न सिर्फ अचूक गोले दाग सकती है बल्कि इसके जरिए सटीक गाइडेड मिसाइलें, APFSDS, HEAT और HE राउंड्स भी दागे जा सकते हैं।
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वजन और रफ्तार: 46.5 टन वजनी इस महाबली टैंक को चलाने के लिए 3 क्रू सदस्यों की जरूरत होती है। इसमें लगा 1,000 हॉर्सपावर का दमदार इंजन इसे 21.5 hp प्रति टन का बेहतरीन पावर-टू-वेट रेशियो देता है, जिससे यह रणभूमि में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है।
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सुरक्षा कवच: दुश्मन के हमलों से बचने के लिए इसमें एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) की परतें चढ़ी हैं। साथ ही यह सीबीआर (केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल) हमलों से सुरक्षित है। इसमें स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर लगे हैं और यह विपरीत परिस्थितियों में 5 मीटर गहरे पानी को भी आसानी से पार कर सकता है।
अपग्रेडेशन का दौर: सेना को मिल रहे हैं टी-90 Mk III टैंक
भारतीय सेना ने अपनी युद्धक क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए 464 उन्नत ‘टी-90 एमके III’ (T-90 Mk III) टैंकों का ऑर्डर भी दिया हुआ है, जिनकी डिलीवरी साल 2024 से शुरू हो चुकी है। इन नए वेरिएंट्स में अत्याधुनिक फायर-कंट्रोल सिस्टम, थर्मल इमेजिंग (रात में देखने की अचूक क्षमता) और जंग के मैदान में जीवित रहने के लिए उन्नत सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय सेना भीष्म टैंकों के इस पूरे बेड़े में इजरायल के मशहूर ‘ट्रॉफी एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम’ (Trophy APS) को एकीकृत करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। यह सिस्टम टैंक की तरफ आने वाली दुश्मन की मिसाइलों या रॉकेटों को हवा में ही भांपकर नष्ट कर देता है, जिससे टैंक की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी।
‘मेक इन इंडिया’ और एमएसएमई (MSMEs) को मिला बड़ा सहारा
1,000 टैंकों के निर्माण का यह ऐतिहासिक पड़ाव भारत के “मेक इन इंडिया” संकल्प और व्यापक “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण की एक बहुत बड़ी जीत है। 90% से अधिक स्वदेशीकरण हासिल करने के कारण इस पूरे प्रोग्राम ने न केवल देश की सीमाओं को सुरक्षित किया है, बल्कि भारत के घरेलू उद्योगों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी बहुत बड़ा संबल दिया है, जो इसके छोटे-छोटे भागों का निर्माण करते हैं। विदेशी आयात पर निर्भरता कम होने से संकट के समय रक्षा उत्पादन की निरंतरता और लचीलापन सुनिश्चित रहेगा। 1000वें टी-90(IM) भीष्म टैंक की यह सफल डिलीवरी भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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