AIADMK के वरिष्ठ नेता सीवी शन्मुगम के नेतृत्व में कम से कम 30 विधायकों ने मुख्यमंत्री जोसफ विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। हालांकि शन्मुगम ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य AIADMK को तोड़ना नहीं है, बल्कि पार्टी के मूल सिद्धांतों को बचाना है।
चेन्नई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शन्मुगम ने कहा कि पार्टी के कई विधायक डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित गठबंधन की खबरों से नाराज हैं। उन्होंने दावा किया कि एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी कथित रूप से DMK के समर्थन से मुख्यमंत्री बनने की योजना बना रहे थे, लेकिन अधिकांश विधायकों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
शन्मुगम ने कहा, “जनादेश स्पष्ट रूप से विजय को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मिला है। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे हमें समझना होगा। जनता ने विजय को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है और हम उस जनादेश का सम्मान करते हैं। इसलिए हम मुख्यमंत्री विजय को दिल से बधाई देते हैं और AIADMK विधायक दल की ओर से टीवीके सरकार को पूरा समर्थन देते हैं।”
तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में से AIADMK इस बार केवल 47 सीटें जीत सकी। इससे पहले 2021 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी DMK गठबंधन से सत्ता गंवा चुकी थी और उसे केवल 75 सीटें मिली थीं। वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी 39 में से केवल एक सीट जीत पाई थी और 2024 के संसदीय चुनाव में उसका खाता तक नहीं खुला।
शन्मुगम ने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विधायकों ने पार्टी महासचिव से जनरल काउंसिल की बैठक बुलाने की मांग की है ताकि हार के कारणों पर चर्चा की जा सके। उन्होंने कहा, “हाल ही में हुए चुनाव में हमें हार का सामना करना पड़ा। सिर्फ इस चुनाव में नहीं, बल्कि पिछले चुनाव में भी हमें हार मिली थी। हमने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि हार के कारणों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई जाए और पार्टी के भविष्य के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।”
शन्मुगम ने डीएमके के साथ संभावित गठबंधन को पार्टी की विचारधारा के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “AIADMK की स्थापना एमजी रामचंद्रन ने DMK को खत्म करने के उद्देश्य से की थी। हम DMK को तमिलनाडु में एक बुरी ताकत मानते हैं। अगर AIADMK, DMK के साथ गठबंधन करती है, तो भविष्य में पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।”
उन्होंने दोहराया कि विधायक दल और पार्टी कार्यकर्ता DMK के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन के खिलाफ हैं और इसी वजह से विधायक दल की बैठक में इसके विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया।
इस घटनाक्रम को दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद से संघर्ष कर रही AIADMK के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शन्मुगम गुट का टीवीके सरकार को समर्थन देना राज्य की राजनीति में शक्ति संतुलन बदल सकता है।
इस बीच शन्मुगम ने घोषणा की कि AIADMK विधायक दल ने एसपी वेलुमणि को विधायक दल का नेता और जी हरि को उपनेता चुना है। वहीं विजय सरकार को मिले इस नए समर्थन से विधानसभा में उसकी स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
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